{"product_id":"rngbhuumi-rangbhoomi-9788121265539","title":"रंगभूमि (Rangbhoomi)","description":"\u003cp\u003e • Author(s): प्रेमचन्द (Premchand)\u003cbr\u003e • Publisher: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपुस्तक के बारे में -: रंगभूमि (1924-1925) प्रेमचन्द का महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है। नौकरशाही तथा पूँजीवाद के साथ जनसंघर्ष का ताण्डव, सत्य, निष्ठा और अहिंसा के प्रति आग्रह, ग्रामीण जीवन तथा स्त्री दुर्दशा का भयावह चित्र इसमें अंकित है. परतंत्र भारत की सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक समस्याओं के बीच राष्ट्रीयता की भावना से परिपूर्ण यह उपन्यास लेखक के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को बहुत ऊँचा उठाता है. देश की नवीन आवश्यकताओं, आशाओं की पूर्ति के लिए संकीणर्ता और वासनाओं से ऊपर उठकर निस्वार्थ भाव से देश सेवा की आवश्यकता उन दिनों सिद्दत से महसूस की जा रही थी। रंगभूमि की पूरी कथा इन्हीं भावनाओं और विचारों में विचरती है। कथा का नायक सूरदास का पूरा जीवनक्रम, यहाँ तक कि उसकी मृत्यु भी राष्ट्रनायक की छवि लगती है। पूरी कथा गाँधी दर्शन, निष्काम कर्म और सत्य के अवलंबन को रेखांकित करती है। यह संग्रहणीय पुस्तक कई अर्थों में भारतीय साहित्य की धरोहर है। कहानी में सूरदास के अलावा सोफी, विनय, जॉन सेवक, प्रभु सेवक का किरदार भी अहम है. इंसान चाहे किसी भी हालत में हो उसे रंगभूमि में आकर कर्म करना ही पड़ता है और जो नीति और धर्म से मुँह मोड़ता है उसे धुत्कार ही मिलती है. सोफी-विनय के प्रेम की गाथा, सोफी और विनय का मिलन जाति भेद के कारण लगभग अंसभव था। उनका प्रेम शाश्वत था। तमाम संघर्षों के बावजूद वो एक दूसरे से प्रेम करते रहे। कारगार मे विनय से मिलने आई सोफी की इन बातों से यह स्पष्ट होता है कि अपनी त्रुटियों और दोषों का प्रदर्शन करके तुमने मुझे और भी वशीभूत कर लिया। अगर तुमने यही निश्चय किया है कि इस कारागार में रहकर तुम अपने जीवन के उद्देश्य को अधिक सफलता के साथ पूरा कर सकते हो तो मैं इस फैसले के आगे सिर झुकाती हूँ। इस विराग ने मेरी दृष्टि में तुम्हारे आदर को कई गुना बढ़ा दिया है। सोफी की मृत्यु की अफवाह प्रसारित होने के बाद विनय का उसे ढूंढ निकालना भी शाश्वत प्रेम का प्रतीक है।\u003c\/p\u003e","brand":"Gyan Publishing House","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46194890899607,"sku":"9788121265539","price":147.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788121265539.webp?v=1769299313","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/rngbhuumi-rangbhoomi-9788121265539","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}