{"product_id":"roop-9789350643440","title":"Roop","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Firaq Gorakhpuri\u003cbr\u003e • Publisher: Rajpal and Sons\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajpal\u003cbr\u003e • BISAC: Asian - General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\"रूप में जो रुबाइयाँ संकलित हैं, 1959 में ये पहली बार उर्दू में प्रकाशित की गयी थीं। इन पर दी गयीं कुछ सम्मतियाँ: ‘‘इन रुबाइयों ने मुझ पर गहरा असर छोड़ा है। ये Re-discovery of India हैं। मानो, भारत की छवि इन रुबाइयों में उजागर होती है।’’ - जवाहरलाल नेहरू ‘‘ये रुबाइयाँ युग-युगान्तर तक भारतीय संस्कृति का अनुभव कराती रहेंगी।’’ - डा. राजेन्द्र प्रसाद ‘‘हिन्दू संस्कृति का साक्षात दर्शन करना हो तो कोई रूप की रुबाइयाँ पढ़े या सुने।’’ - पंडित मदनमोहन मालवीय ‘‘ ‘फिराक’ उर्दू शायरी का सुहाग है।’’ - ‘जोश’ मलीहाबादी ‘‘मैं क्या कविता करता हूँ, कविता तो ‘फ़िराक़’ करते हैं।’’ - सुमित्रानन्दन पंत ‘‘प्रयाग आकर अगर तुमने ‘फ़िराक़’ के मुँह से ‘फ़िराक़’ की कविता नहीं सुनी तो व्यर्थ प्रयाग आए।’’ - ‘निराला’\"\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajpal and Sons","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46523017101463,"sku":"9789350643440","price":88.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789350643440.webp?v=1767177879","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/roop-9789350643440","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}