{"product_id":"s-h-vatsyayan-ajneya-9788173158599","title":"S.H. Vatsyayan 'Ajneya'","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ramesh Chandra Shah\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपत्रकारिता के युग निर्माता : स.ही. वात्स्यायन ‘अज्ञेय’—प्रो. रमेशचंद्र शाहसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ मूलत: साहित्यकार रहे, किंतु उनका पत्रकारी-संपादक कृतित्व भी उतना ही महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय है। अज्ञेय की पत्रकारिता के दो रूप हैं—साहित्यिक पत्रकारिता और मुख्यधारा की पत्रकारिता, जिसमें सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों का स्वर प्रधान रहा। सन् 1965 में अज्ञेय के संपादकत्व में प्रकाशित ‘दिनमान’ स्वातंत्र्योत्तर हिंदी पत्रकारिता में एक नया मोड़ लेकर आया। ‘दिनमान’ ने पत्रकारिता को नई भाषा और शैली दी। विषयों का विस्तार दिया। कला-समीक्षा, विज्ञान, संस्कृति, कृषि, राजनीति, समाज—सब के सब सर्वथा नए आयाम और जन-सरोकारों के साथ ‘दिनमान’ में मुकाम पाते रहे। उन्होंने सुदूर कस्बों तक लेखकों-पत्रकारों की बड़ी जमात तैयार की। उन्हें सरल भाषा में सीधी बात लिखने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। सच लिखने का हौसला और संघर्ष में संरक्षण दिया। ‘दिनमान’ निकलते ही अवाम की आवाज और पत्रकारों की पाठशाला बन गया। यही है अज्ञेय होने का मतलब। अज्ञेय ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘प्रतीक’ के भी संपादक रहे। उनकी पत्रकारिता आगरा के ‘सैनिक’ और कलकत्ता के ‘विशाल भारत’ से परवान चढ़ी; परंतु नवाचार और नव-प्रयोगों के कारण ‘दिनमान’ हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गया। अज्ञेय को सर्वांग रूप में सहजता से समझने-जानने में सहायक एक पठनीय पुस्तक।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46839475863703,"sku":"9788173158599","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788173158599.webp?v=1769160744","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/s-h-vatsyayan-ajneya-9788173158599","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}