{"product_id":"sab-par-ram-tapasvi-raja-9789309020230","title":"Sab Par Ram Tapasvi Raja","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ashutosh Agnihotri\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eराम भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का एक अभिन्न अंग हैं। रामकथा भी। उन्हें जानने के लिए हमें अलग से कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं होती। राम हमें हमारे पर्यावरण से निरायास मिल जाते हैं। राम-नाम भारतीय मानस के व्यवहार का एक सकर्मक हिस्सा हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘सब पर राम तपस्वी राजा’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e रामकथा की कुछ निर्णायक और बोधक घटनाओं को पुनः व्याख्यायित करनेवाली कविताओं का संग्रह है। राम वनवास, सीता का हरण, लंका में युद्ध आदि प्रकरणों से सभी परिचित हैं लेकिन ये कविताएँ उन्हें अपनी एक विशिष्ट शैली और रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत करती हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e राम-चेतना में अटूट आस्था रखनेवाले कवि आशुतोष अग्निहोत्री अपनी अब तक की रचना-यात्रा में बहुधा राम की ओर लौटते रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने अपने उसी राम-भाव का और गहराई के साथ अवगाहन किया है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e छन्द और लय पर उनकी असाधारण पकड़ है जिसके चलते ये कविताएँ सन्दर्भित घटनाओं और रामकथा के पात्रों को कई आयामों से आलोकित करती चलती हैं। संवादों के साथ पात्रों का आंतरिक भावात्मक परिप्रेक्ष्य भी इनमें अपने सम्पूर्ण विस्तार के साथ पाठक के समक्ष उपस्थित हो जाता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e कवि का मानना है कि राम सिर्फ दशरथ पुत्र ही नहीं, निराकार ब्रह्म भी हैं जिनकी महिमा का बखान कविगण सदैव ही अपने-अपने ढंग से करते रहे हैं। उसी सुदीर्घ और व्यापक शृंखला की एक कड़ी यह भी है। पाठक निश्चय ही इसे अपना-सा पाएँगे।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47929320243351,"sku":"9789309020230","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789309020230.webp?v=1781763054","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sab-par-ram-tapasvi-raja-9789309020230","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}