{"product_id":"sajhe-lamhon-ki-mahak-9789373487045","title":"Sajhe Lamhon Ki Mahak","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Alok Kumar\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eआलोक कुमार की कविताओं का संग्रह मेरे सम्मुख है। एक कवि को जीवन के अनेक कथ्य किस तरह विचलित करते हैं कि वह उन्हें कह देने के लिए तत्पर हो उठता है। इन कविताओं में सजग चेतन और अवचेतन के भीतर का द्वन्द्व भी है। कभी फुर्सत के क्षणों में, कभी भोर, कभी शाम, कभी विमान यात्राओं में लिखी गयी कविताएँ उनकी संवेदनशीलता का परिचय देती हैं। कविता 'पगडंडी' स्नेह और वर्जना के बीच सम्बन्धों के समीकरण को तय करते हुए जिस मुकाम पर पहुँचती है वह केवल अनुभवगम्य है। इस कविता के भीतर वह सब कुछ है जो कि मानवीय इकाई के भीतर की उथल-पुथल है जो संकेतों-संकेतों में ही इसमें जैसे समा गयी है। कविता देखें- स्नेह और वर्जना के बीच की इक हैरान सी पगडंडी ले जाती है उस दरवाज़े तक जिस पर लिखा है तुम्हारा नाम जब खुलता है दरवाज़ा तो चौखट के दोनों तरफ़ खुद को ही पाता हूँ - पगडंडी\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":47140276273303,"sku":"9789373487045","price":228.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789373487045.webp?v=1773141445","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sajhe-lamhon-ki-mahak-9789373487045","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}