{"product_id":"samay-aur-sanskriti-9788170554646","title":"Samay Aur Sanskriti","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shyamacharan Dubey\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: Sociology - General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपरंपरा की अनिवार्य महत्ता और उसके राजनीतिकरण से होनेवाले विनाश को पहचान कर ही हम वास्तविक भारतीयता को जान सकते हैं। इसके लिए समस्त समाजिक बोध से युक्त इतिहास-दृष्टि की जरूरत है, क्योंकि अंतद्वंद्व और विरोधाभास हिंदू-अस्मिता के सबसे बड़े शत्रु हैं। दूसरी तरफ समाज के चारित्रिक ह्रास के कारक रूप में संक्रमणशील समाज के सम्मुख परिवर्तन की छद्म आधुनिकता और धर्म के दुरुपयोग के घातक खतरे मौजूद हैं। पश्चिम के दायित्वहीन भोगवादी मनुष्य की नकल करने वाले समाज में संचार के माध्यमों की भूमिका सांस्कृतिक विकास में सहायक न रहकर नकारात्मक हो गई है। ऐसे में बुद्धिजीवी वर्ग की समकालीन भूमिका और भी जरूरी तथा मुश्किल हो गई है।परंपरा सामाजिक ऊर्जा का एक सशक्त स्रोत है। यह कहते हुए प्रो. श्यामाचरण दुबे यह गंभीर चेतावानी देते हैं कि वैश्वीकरण के नाम पर एक भोगवादी संस्कृति में लोक-संस्कृति और लोककला का भी अहम् हिस्सा है। उसके वर्तमान और भविष्य की चिंता के साथ-साथ संस्कृति और सत्ता के संबंध जिस वैज्ञानिक दृष्टि से समय और संस्कृति में करने की कोशिश की गई है उससे समकालीन सामाजिक सांस्कृतिक समस्याओं का संतुलित मूल्यांकन संभव हुआ है।श्यामाचरण दुबे का समाज-चिंतन इस अर्थ में विशिष्ट है कि वह कोरे सिद्धांतों की पड़ताल और जड़ हो चुके अकादमिक निष्कर्षों के पिष्ट-प्रेषण में व्यर्थ नहीं होता। इसीलिए उनका चिंतन उन तथ्यों को पहचानने की समझ देता है, जिन्हें जीवन जीने के क्रम में महसूस किया जाता है, लेकिन उन्हें शब्द देने का काम अपेक्षाकृत जटिल होता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523153514647,"sku":"9788170554646","price":220.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788170554646.webp?v=1767180311","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/samay-aur-sanskriti-9788170554646","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}