{"product_id":"sampoorna-kahaniyan-amarkant-9789360864125","title":"Sampoorna Kahaniyan: Amarkant","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Amarkant | Arvind Bindu\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eअमरकान्त\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e हिन्दी के ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने किसी वाद या विचारधारा को अपनी रचनात्मकता का आधार नहीं बनाया, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और संवेदनापूर्वक देखी गई जीवन-स्थितियों को लेकर जन-पक्षधर और प्रगतिशील कहानियाँ लिखीं। मध्यवर्गीय जीवन, उसके विरोधाभासों और समाज के दैनंदिन व्यवहार में निहित अमानवीयता को खासतौर पर रेखांकित करते हुए उन्होंने एक विराट कथा-संसार का सृजन किया। उनकी कुछ कहानियों के सन्दर्भ में यशपाल ने उनकी तुलना गोर्की से की थी। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e वे अपने पात्रों को एक निस्पृह भाव से देखते हैं, और अपनी तरफ से कोई विचार या दृष्टि आरोपित किए बिना, महज मानवीयता के परिप्रेक्ष्य में उन्हें यथावत चित्रित करते हैं, यही विशेषता उनकी कहानियों और उनके रचे पात्रों को असाधारण बना देती है। उनके कथा-संसार में हम आज़ादी बाद के लंबे समय की एक सांस्कृतिक-सामाजिक पड़ताल से रू-ब-रू होते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यह उनकी कहानियों की समग्र प्रस्तुति है। ‘हत्यारे’ और ‘दोपहर का भोजन’ जैसी कालजयी कहानियों के रचनाकार को यहाँ आप उसकी सम्पूर्ण विशेषताओं के साथ जान पाएँगे।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716905156759,"sku":"9789360864125","price":699.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360864125.webp?v=1776940644","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sampoorna-kahaniyan-amarkant-9789360864125","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}