{"product_id":"sarjana-path-ke-sahyatri-9789360867003","title":"Sarjana Path Ke Sahyatri","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nirmal Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eनिर्मल वर्मा ने जिस तरह कथाभाषा पर अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ी, उसी तरह रचना-चिन्तन और हिन्दी व अन्य भाषाओं के रचनाकारों पर केन्द्रित अपने लेखन में भी विश्लेषण और विवेचन का एक अलग मुहावरा गढ़ा। उन्होंने समय-समय पर अपने प्रिय लेखकों-कलाकारों पर लिखा। इन लेखों में उन्होंने ‘आलोचना की लगी-बँधी खूँटी से अपने को छुड़ाकर’ आत्मीय प्रतिक्रियाओं के प्रवाह में स्वयं को बहने दिया है। इसी आत्मीयता के चलते ये निबन्ध रचनात्मकता का एक अत्यन्त सकारात्मक और प्रेरक वातावरण रचते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eभाषा के नैतिक और आध्यात्मिक आयामों को विकसित करती उनकी ये पारदर्शी गद्य रचनाएँ मूर्धन्य व्यक्तियों के आलोक और अँधेरे को जिस सजीवता के साथ प्रकट करती हैं वह दुर्लभ साधना और अनिवार्य जिज्ञासा से ही अर्जित की जा सकती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक में देश के महत्त्वपूर्ण रचनाकारों—प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, हजारीप्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, रेणु, मुक्तिबोध, भीष्म साहनी, धर्मवीर भारती, मलयज और चित्रकारों-कलाकारों—हुसेन, रामकुमार, स्वामीनाथन पर तो आलेख हैं ही, बोर्ख़ेज़, नायपॉल, नाबोकोव, राब्ब ग्रिये और लैक्सनेस पर भी बेहद संजीदगी और तरल संवेदना से लैस रचनाएँ संकलित हैं।  \u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285696635031,"sku":"9789360867003","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360867003.webp?v=1769284092","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sarjana-path-ke-sahyatri-9789360867003","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}