{"product_id":"seen-75-9788126709885","title":"Seen : 75","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rahi Masoom Raza\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e“अली अमजद से मिलाया था न मैंने तुमको?”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“वह राइटर?”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“हाँ!”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“हाँ-हाँ यार, याद आ गया। बड़ा मज़ेदार आदमी है।”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“उसी का तो चक्कर है।” हरीश ने कहा, “आज ही प्रीमियर है। और वह मर गया। समझ में नहीं आता क्या करूँ?”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“मर कैसे गया?”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“पता नहीं। मैं अभी वहीं जा रहा हूँ।”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआईने में उसने अपने चेहरे को उदास बनाकर देखा। उसे अपना उदास चेहरा अच्छा नहीं लगा। उसने आँखों को और उदास कर लिया...\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअली अमजद मरा नहीं, क़त्ल किया गया है। और उसे क़त्ल किया है इस जालिम समाज, बेमुरव्वत हालात और इस बेदर्द फ़िल्म इंडस्ट्री ने...\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउसने गरदन झटक दी। बयान का यह स्टाइल उसे अच्छा नहीं लगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमेरा दोस्त अली अमजद एक आदमी की तरह जिया और किसी हिन्दी फ़िल्म की तरह बिला वज़ह ख़त्म हो गया।...\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eदाढ़ी बनाते-बनाते उसने अपना बयान तैयार कर लिया। और इसलिए जब वह अली अमजद के फ़्लैट में दाख़िल हुआ तो वह बिलकुल परेशान नहीं था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहिन्दी फ़िल्म उद्योग की चमचमाती दुनिया की कुछ स्याह और उदास छवियों को बेपर्दा करता उपन्यास।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285624807575,"sku":"9788126709885","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126709885.webp?v=1769283908","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/seen-75-9788126709885","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}