{"product_id":"shadi-se-peshtar-9789360869977","title":"Shadi Se Peshtar","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Sharmila Jalan\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eशादी, ख़ासकर लड़कियों की एक कठिन, जटिल और अत्याधुनिक समस्या बनती जा रही है। वह जीवन का एक मुक़ाम है, परम और चरम लक्ष्य नहीं, ऐसी प्रतीति पढ़ी-लिखी और तथाकथित आधुनिक लड़की को भी नहीं हो पाती क्योंकि बहुत कुछ बदलने के बावजूद समाज जस का तस रह गया है। आधुनिक और आज़ाद दिखाई दे रही लड़की के माता-पिता की भी तलाश अच्छा लड़का और ठीक-ठाक घर ढूँढ़ने से आगे नहीं जा पाती। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e जब तक शादी न हो तब तक लड़की क्या करे? शादी से पेशतर की कई लड़कियों में एक डेज़ी कहती है, “कुछ सोचो मत, बस करती चली जाओ।” क्या करती चली जाओ? नये-नये कोर्स—ब्यूटीशियन बनने के, कम्प्यूटर विशेषज्ञ बनने के, इंटीरियर डेकोरेटर बनने के और न जाने क्या-क्या। इस करते जाने के पीछे एक धुँधला-सा संकेत अपने पैरों पर खड़े होने का भी ज़रूर रहता है, लेकिन वह शादी को ही ‘मोक्ष’ मानने के कारण ठोस रूप ग्रहण नहीं कर पाता। शादी से पेशतर हमें एक ऐसे अन्तःपुर के एकदम भीतर ले जाता है, जिसकी विदीर्णता का हम अनुमान भी नहीं लगा पाते क्योंकि हमें जो दिखाई पड़ता है उसी को देख रहे होते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यह एक ऐसा कोलाजनुमा लघु उपन्यास है जो सरसरी दृष्टि से पढ़ने पर सतह पर ही तैरता मालूम पड़ता है, पर ध्यान देने पर यह बताता है कि सतह सिर्फ़ सतही नहीं होती, उसमें नीचे गहराई और डूब भी रहती है। शर्मिला बिना किसी लेखकीय टिप्पणी और गुरुगम्भीरता के शादी का इन्तज़ार करती हुई लड़कियों से हमारी इस तरह मुलाक़ात करवाती हैं कि हम परेशानी महसूस करने लगते हैं। वह हमें लड़की देखने आए लोगों में बैठा देती हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716888608919,"sku":"9789360869977","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360869977.webp?v=1776940568","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/shadi-se-peshtar-9789360869977","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}