{"product_id":"shesh-kadambari-9788126708574","title":"Shesh Kadambari","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Alka Saraogi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘सोशल वर्क’ और ‘सोशल जस्टिस’ इन दो शब्दों के बीच के स्पेश का मोहक किन्तु मार्मिक प्रतिबिम्बन है अलका सरावगी का उपन्यास—‘शेष कादम्बरी’। वृद्ध और युवा जीवन-दृष्टि के फ़र्क़ को रेखांकित करनेवाला यह उपन्यास अलका सरावगी के जीवन्त लेखन का ऐसा प्रतीक है जिसमें उन्नीसवीं सदी में जन्मे, रूबी दी के मामा देवीदत्त का व्यक्तित्व रूबी दी के लिए ‘आइडेंटिटी क्राइसिस’ का कारक बनकर उभरता है। इस ‘आइडेंटिटी क्राइसिस’ की गिरफ़्त में रूबी दी अपनी किशोरावस्था में ही आ चुकी हैं और इससे उबरने के प्रयास में वे एकरेखीय ‘सोशल-वर्क’ के आडम्बर से जुड़ी रहीं और अन्ततः अपनी नातिन ‘कादम्बरी’ में अपनी शेष कथा देखने को बाध्य हुईं। जीवन और उपन्यास का तालमेल बैठाने के लिए अलका सरावगी ने परिचित ढाँचे से बाहर निकलकर यह रेखांकित किया है कि ‘शेष कादम्बरी’ ऐसा जीवन है जिसमें उपन्यास का प्रवाह या फिर जीवन का \u003cbr\u003eउद् दात है। अलका सरावगी की यह औपन्यासिक कृति उपभोक्तावादी मूल्यों के बरक्स उदारवादी मूल्यों की स्थापना भी करती है। आधुनिक जीवन के पेचोखम का रूपायण इस उपन्यास को अविस्मरणीय बनाता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285657608343,"sku":"9788126708574","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126708574.webp?v=1769283993","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/shesh-kadambari-9788126708574","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}