{"product_id":"sire-se-kharij-9789347043369","title":"Sire Se Kharij","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Anoop Mani Tripathi\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eत्रासदी जब जीवन में रोजमर्रा का हिस्सा बन जाती तो वह प्रहसन बन जाती है। दुःख की सघनता करुणा या क्रोध की जगह एक निर्मम हँसी के शिल्प में व्यक्त होती है। व्यंग्य का सम्बन्ध विनोद से नहीं गहरी करुणा से जुड़ा होता है। हरिशंकर परसाई की परम्परा और श्रीलाल शुक्ल की पाठशाला के सिद्ध और प्रसिद्ध व्यंग्यकार अनूप मणि त्रिपाठी की रचनाओं का मूल स्वभाव यही है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e एक ऐसे समय में जब लगातार बदरूप होता जा रहा यथार्थ असम्भव कल्पनाओं का भी अतिक्रमण करता जा रहा है तब चित्रण की पुरानी और प्रचलित यथार्थवादी शैली आज के यथार्थ को पकड़ने में नाकाफी होने लगी है। इसी वजह से कविता में फैन्टेसी और बिम्बों का चलन बढ़ा और गद्य का स्वभाव व्यंग्यात्मक होता जा रहा है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e ‘सिरे से ख़ारिज’ संग्रह आज की राजनीतिक, सामाजिक (और साहित्यिक भी) विडम्बनाओं पर लेखक की गहरी प्रतिक्रिया और तीखी टिप्पणी के रूप में हमेशा दर्ज किया जाएगा। भले ही लेखक ने रावण की कल्पित कहानियाँ लिखी हैं, लेकिन वह कल्पित रावण की सच्ची कहानियों के रूप में पढ़ी जाएँगी। तब लोग पाएँगे कि इस आर्यावर्त में राजा के प्रेम-पत्र का आलम्बन भारत माता नहीं, सूखे काठ की ठूँठ कुर्सी रही है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e'सिरे से ख़ारिज'\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e के इन वाकयात की असली ताकत यह है कि किताब के हाथ में होने तक ये आपको गुदगुदाएँगे और जब आप पढ़कर किताब को रख देंगे तो धीरे-धीरे अपने आगोश में जकड़ते चले जाएँगे। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e —देवेन्द्र\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716887068823,"sku":"9789347043369","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789347043369.webp?v=1776940565","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sire-se-kharij-9789347043369","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}