{"product_id":"son-sagar-9789360862008","title":"Son Sagar","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Habib Tanvir\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: [\"[\"Literary\"]\"]\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eसोन सागर\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e को हबीब तनवीर ने सन् 1981 में श्रीराम सेंटर, नई दिल्ली में प्रस्तुत किया था। इस नाटक की नायिका चन्दा एक सशक्त महिला चरित्र के रूप में सामने आती है। वह जीवनसाथी स्वयं चुनने के अधिकार की बात उठाकर एक खुली सोच का उदाहरण रखती है। यह नाटक मूलकथा लोरिक और चन्दा की प्रेम-कहानी है जो छत्तीसगढ़ में ‘चन्दैनी’ और बिहार में ‘लोरिकायन’ के नाम से प्रसिद्ध है। मूलत: एक ही कथा होने के बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों में इसके भिन्न-भिन्न रूप मिलते हैं। नाटक में ढालने के लिए मूल कथा में रचनात्मक बदलाव किया गया। कथा एवं चरित्रों के कुछ खास पक्षों पर जोर देकर इसे समकालीन परिप्रेक्ष्य प्रदान करने के लिए इसमें गीत रखे गए। वस्तुत: गीतों में टिप्पणी के जरिये यह काम किया गया। नाटक में कहानी के ग्राम्य तत्वों को प्रमुखता दी गई है तथा कहानी के अलौकिक पक्ष को छोड़ दिया गया है। कुछेक गीतों की धुनें तो चन्दैनी की पारम्परिक धुनों पर ही आधारित हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716879335575,"sku":"9789360862008","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360862008.webp?v=1776940517","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/son-sagar-9789360862008","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}