{"product_id":"sone-ka-quila-9788126718825","title":"Sone Ka Quila","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Satyajit Ray | Tr. Ramesh Thanavi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसत्यजित राय ने इस उपन्यास में अपने किशोर पाठकों को बंगाल से राजस्थान तक की यात्रा कराई है—कलकत्ता से जैसलमेर तक की यात्रा। यह उपन्यास एक ऐसे किशोर बालक मुकुल की कथा है जिसे पूर्व जन्म की बातें याद रहती हैं। साथ ही यह एक ऐसे जासूस की कथा है जिसे इस प्रकार के सारे रहस्य खोज निकालने का शौक़ है। अपनी इस विद्या में वह पूरी तरह निपुण है। ये जासूस फेलूदा हैं जिनका पूरा नाम है प्रदोष मित्तिर।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमुकुल के पूर्व जन्म की बातों की खोज करने निकले फेलूदा। मुकुल के पूर्व जन्म में एक सोने का क़िला था, एक जगह कहीं गड़ा ख़ज़ाना और उसके घर के पास ही कहीं लड़ाई चल रही थी। फेलूदा यह सब खोजते-खोजते कलकत्ता से जैसलमेर पहुँच गए। सोने का क़िला व गड़ा ख़ज़ाना कइयों को ललचा गया था। गड़ा ख़ज़ाना कौन खोज निकाले और कौन उस पर क़ब्ज़ा करे, इस पर दूसरी दौड़ भी शुरू हो गई थी। फेलूदा जानते थे कि लोग उनका पीछा करेंगे। वे सतर्क थे। पीछा करनेवाले बदमाशों ने बड़ा जाल रचा, मगर फेलूदा मात खानेवाले नहीं थे। पक्के जासूस थे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसत्यजित राय का यह किशोर उपन्यास पाठकों को ख़ूब मज़े से राजस्थान के कई शहर किसनगढ़, बीकानेर, जोधपुर, पोखरण, रामदेवरा और फिर जैसलमेर दिखाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘सोने का क़िला’ सत्यजित राय के चार किशोर उपन्यासों में से एक है। इस उपन्यास के चित्र भी उन्होंने स्वयं बनाए हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285603967127,"sku":"9788126718825","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126718825.webp?v=1769283854","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/sone-ka-quila-9788126718825","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}