{"product_id":"swami-ramanand-9789393603418","title":"Swami Ramanand","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Kanhaiya Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eस्वामी रामानन्द एक युगपुरुष थे। चौदहवी शताब्दी में उन्होंने दक्षिण भारत से भगवान विष्णु की भक्ति को रामभक्ति के रूप में लाकर प्रतिष्ठित किया और विपरीत प्रतीत होने वाली दो धाराओं में समन्वय और सामंजस्य स्थापित किया। उन्होंने निर्गुण और सगुण भक्ति के समन्वय का कार्य किया। उनके अनुसार ये दोनों ही भक्तिमार्ग विधेय हैं। इन दोनों को जोड़ने का सेतु उनका 'राम-नाम' का मंत्र बना । नाम का जप करना निर्गुण और सगुण दोनों ही मार्गों के कवियों ने स्वीकार किया। स्वामी जी ने यह कहा कि ब्राह्मण शूद्र सहित चारों वर्ण के लोग भक्ति के अधिकारी हैं। उनके द्वारा समन्वय के सम्बन्ध में कहा गया- 'जाति पाँति पूछै नहिं कोई। हरि को भजै सो हरि का होई।' उनके अनुसार पुरुष की भाँति स्त्री भी भक्ति की अधिकारिणी है। स्वामी जी ने इस प्रकार अपने समन्वय और सामंजस्य के द्वारा एक प्रबल सबल राष्ट्र- निर्माण की वह भूमिका बनाई जो भारत को एक भव्य-दिव्य भारत बनाकर विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित कर सकती है। प्रमुख भारतीय साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह पाठ [सम्पादन एवं सूफी काव्य के अधिकृत विद्वान् के रूप में हिन्दी जगत में सुपरिचित हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":48090852819095,"sku":"9789393603418","price":137.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789393603418.webp?v=1785499915","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/swami-ramanand-9789393603418","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}