{"product_id":"syahi-mein-surkhab-ke-pankh-9788126730025","title":"Syahi mein Surkhab Ke Pankh","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Alpana Mishra\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eअल्पना मिश्र की कथा-क्षमता विवरण-बहुलता में वास्तविकता के और-और क़रीब जाने की कोशिश में दिखाई देती है, जिसमें वे एक कुशल शिल्पी की तरह सफल होती हैं। उनकी कहानियों में कहीं भी शाब्दिक चमत्कार से कथ्य अथवा दृष्टि के अभाव को पूरा करने की न मजबूरी दिखाई देती है, न चालू मुहावरे का कोई ऐसा दबाव कि वे जीवन-स्थितियों के सच से अपनी पकड़ को ज़रा भी ढीली करें।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनब्बे के दशक में सामने आए कथाकारों में उन्होंने अपनी एक विशिष्ट जगह बनाई है और लगातार चर्चा में रही हैं। अपने इर्द-गिर्द के संसार में पूरे भरोसे और स्पष्ट आलोचनात्मकता के साथ उतरकर गझिन और कथा-तत्त्व से भरपूर कहानियाँ बुनना उन्होंने जिस तरह सिद्ध किया है, वह भाषा को एक भरोसा देता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस संग्रह में शामिल ‘स्याही में सुर्खाब के पंख’, ‘कत्थई नीली धारियों वाली क़मीज़’, ‘चीन्हा-अनचीन्हा’, ‘सुनयना! तेरे नैन बड़े बेचैन’, ‘राग-विराग’, ‘इन दिनों‘ और ‘नीड़’ कहानियाँ यहाँ पुन: उनके सामर्थ्य की साक्षी के रूप में मौजूद हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए पाठक को वापस यह विश्वास होगा कि बिना किसी आलंकारिकता के जीवन-यथार्थ को विश्वसनीय ढंग से पकड़ना आज के उथले समय में भी सम्भव है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285690638487,"sku":"9788126730025","price":88.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126730025.webp?v=1769284078","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/syahi-mein-surkhab-ke-pankh-9788126730025","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}