{"product_id":"tareekh-hamein-saath-liye-jaatee-hai-9789360865344","title":"Tareekh Hamein Saath Liye Jaatee Hai","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Hariom\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकविता अन्ततः एक भाषिक संरचना है। शब्दों को बरतने की कला है। लय और संरचना उसके अनिवार्य तत्व हैं। समकालीन भारतीय राजनीति की शिकार सिर्फ़ मनुष्यता ही नहीं हमारी भाषा भी हुई है। वो भाषा जो अमीर ख़ुसरो, ग़ालिब, मीर, रहीम से लेकर मुक्तिबोध की सृजनात्मकता से गुज़रकर हमें प्राप्त हुई।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहरिओम की कविताएँ भाषा का एक खोया हुआ आत्मीय संसार गोया हमे वापिस सौंपती हैं। उनके लेखन में एक स्वाभाविक लय है जो अपनी सहजता से हमें चकित करती है। इसे एक लम्बे अभ्यास के बिना प्राप्त करना असम्भव है। कहीं-कहीं नए शब्दों को शामिल करते हुए अनायास ही वे भाषा की न सिर्फ़ पुनर्रचना करते प्रतीत होते हैं; बल्कि उसे नया संस्कार भी देते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eऔर हम सदियाँ बिताकर आ गए थे जैसे लम्हों में—वाक्य ऐसे लगते हैं जैसे किसी शेर का पूरा मिसरा हों। भूख से नहीं मरता कोई—जैसा यांत्रिक, संवेदनहीन अहम्मन्य वाक्य जैसे किसी ग़ैरज़िम्मेदार तानाशाह का प्रतीक बन जाता है। अपने समय और समाज की गहरी चिन्ता और एहसास के बावजूद इस संग्रह की मुख्य थीम प्रेम है। वे कहते हैं—वक़्त ने जगह को ऐसे घेर रखा है\/जैसे मेरी बाँहों ने तुम्हें।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवक़्त और जगह याद करिए—Time \u0026amp; Space—आइंस्टाइन ने जब समय को स्थान का अनिवार्य चौथा आयाम बताया था तो वैज्ञानिकों को ये समझने में कुछ समय लगा था। किन्तु प्रेम की अनुभूति के बरक्स समय और स्थान के युग्म को हरिओम इस सहजता से लाकर रख देते हैं कि हमें ये बोध ही नहीं होता कि उनकी बाँहों में समय है। और उनकी प्रेमिका जिसे वे ‘तुम’ कहकर सम्बोधित कर रहें हैं—वो जगह है, वो पृथ्वी है, वो अन्तरिक्ष है। जिसका समय से मुक्त होना असम्भव है बल्कि अस्तित्व भी असम्भव है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहरिओम युवा हैं। अपने शब्दों को यक़ीन के साथ स्वर देते हैं और लय पर उनका अधिकार है। तारीख़ हमें साथ लिये जाती है  संग्रह में इसके अलावा भी बहुत कुछ है और जो नहीं है वो अगली रचनाओं में और ताक़त के साथ आएगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस यक़ीन के साथ शुभकामनाओं सहित...\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—नरेश सक्सेना\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285672648855,"sku":"9789360865344","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360865344.webp?v=1769284031","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/tareekh-hamein-saath-liye-jaatee-hai-9789360865344","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}