{"product_id":"teen-upanyas-9788126721085","title":"Teen Upanyas","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Qurratul Ain Haider\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो’ मामूली नाचने-गानेवाली दो बहनों की कहानी है जो बार-बार मर्दों के छलावों का शिकार होती हैं। फिर भी यह उपन्यास जागीरदार घराने के आर्थिक ही नहीं, भावनात्मक खोखलेपन को भी जिस तरह उभारकर सामने लाता है, उसकी मिसाल उर्दू साहित्य में मिलना कठिन है। एक जागीरदार घराने के आग़ा फ़रहाद बकौल ख़ुद पच्चीस साल के बाद भी रश्के-क़मर को भूल नहीं पाते और हालात का सितम यह कि उसके लिए बन्दोबस्त करते हैं तो कुछेक ग़ज़लों का ताकि “अगर तुम वापस आओ और मुशायरों में मदऊ (आमंत्रित) किया जाए तो ये ग़ज़लें तुम्हारे काम आएँगी।” आख़िर सब कुछ लुटने के बाद रश्के-क़मर के पास बचता है तो बस यही कि “कुर्तों की तुरपाई फ़ी कुर्ता दस पैसे...” जहाँ उपन्यास का शीर्षक ही हमारे समाज में औरत के हालात पर एक गहरी चोट है, वहीं रश्के-क़मर की छोटी, अपंग बहन जमीलुन्निसा का चरित्र, उसका धीरज, उसका व्यक्तियों को पहचानने का गुण और हालात का सामना करने का हौसला मन को सराबोर भी कर जाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eखोखलापन और दिखावा-जागीरदार तबक़े की इस त्रासदी को सामने लाने का काम ‘दिलरुबा’ उपन्यास भी करता है। मगर विरोधाभास यह है कि समाज बदल रहा है और यह तबक़ा भी इस बदलाव से अछूता नहीं रह सकता। यहाँ लेखिका ने प्रतीक इस्तेमाल किया है फ़िल्म उद्योग का, जिसके बारे में इस तबक़े की नौजवान पीढ़ी भी उस विरोध-भावना से मुक्त है जो उनके बुज़ुर्गों में पाई जाती थी। मगर उपन्यास का कथानक कितनी पेचीदगी लिए हुए है, इसे स्पष्ट करता है गुलनार बानो का चरित्र—इसी तबक़े की सताई हुई ख़ातून जो अपना बदला लेने के लिए इस तबक़े की एक लड़की को दिलरुबा बनाती है (इस तरह नज़रिए की इस तब्दीली का माध्यम भी बनती है) और ख़ुदा का शुक्रिया अदा करती है कि उसने “एक तवील मुद्दत के बाद मेरे कलेजे में ठंडक डाली।”\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eतीसरा उपन्यास ‘एक लड़की की ज़िन्दगी’ है जिसे लेखिका की बेहतरीन तख़लीक़ात में गिना जाता है। यहाँ उन्होंने एक रिफ़्यूजी सिन्धी लड़की के ज़रिए पूरे रिफ़्यूजी तबक़े के दुख-दर्द को उभारा है। उस लड़के की किरदार को लेखिका ने इस तरह पेश किया है कि वह अकेली शख़्सियत न रहकर रिफ़्यूजी औरत का नुमाइंदा किरदार बन जाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस तरह क़ुर्रतुल ऐन हैदर के ये तीनों उपन्यास उनके फ़न के बेहतरीन नमूनों में गिने जा सकते हैं, साथ ही ये पढ़नेवाले के सामने उर्दू फ़िक्शन के तेवर को बड़े ही कारगर ढंग से पेश करते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285628674199,"sku":"9788126721085","price":137.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126721085.webp?v=1769283919","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/teen-upanyas-9788126721085","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}