{"product_id":"tejasvini-akka-mahadevi-ke-vachan-9788119028634","title":"Tejasvini : Akka Mahadevi Ke Vachan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Akka Mahadevi | Tr.Gagan Gill\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eबारहवीं सदी के तीसरे दशक में, सन् 1130 के आसपास कभी उनका जन्म हुआ था, दक्षिण भारत, कर्नाटक के शिवमोगा जिले के एक गाँव उदूतड़ी में। शिव-भक्त माता-पिता के घर में।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपरम्परा कहती है, वह अनन्य सुन्दरी थीं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमनुष्य सुन्दरता सहन करने के लिए नहीं बने। सुन्दरता उनमें सदा से हिंसा जगाती आई है। तिस पर एक स्त्री की सुन्दरता, भक्त मन वाला उसका आलोक, उसकी आभा, उसकी तन्मयता!\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसुन्दरी महादेवी को कभी न कभी वेध्य होना ही था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेकिन उन्हें किसी दूसरे ने नहीं वेधा। यह उपक्रम उन्होंने स्वयं ही किया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकब महादेवी पहले-पहल स्त्री देह के वस्त्र से मुक्त हुईं, फिर काया के भीतर के मल-मूत्र से, कब वह मात्र आलोक खोजता केवल एक भक्त-मन रह गईं—उनकी जीवन-यात्रा सहज ही हमें सदियों से रोमांचित करती आ रही है, लगभग विमूढ़ और अवाक् करती।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eये जो उन अक्का महादेवी के वचन हमें आज व्याकुल कर देते हैं, ये उनके बोल, जो उन्होंने कभी लिखे नहीं थे, सुधारे या काटे-छाँटे नहीं थे। न ये कविताएँ थीं, न छंद। एक भक्त स्त्री के दिल की अग्नि ने इन्हें तपाया था, इन स्ववचनों को, एकालापों को।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह उनके वचनों का हिन्दी रूपांतरण है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285700927639,"sku":"9788119028634","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119028634.webp?v=1769284104","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/tejasvini-akka-mahadevi-ke-vachan-9788119028634","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}