{"product_id":"thee-hoon-rahoongi-9788126722327","title":"Thee Hoon Rahoongi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Vartika Nanda\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eयह पहला मौक़ा है जब एक अपराध पत्रकार ने अपराध पर ही कविताएँ लिखी हैं। एनडीटीवी में बरसों अपराध बीट की प्रमुखता और बाद में ‘बलात्कार’ पर पीएच.डी. ने देश की इस विख्यात पत्रकार को महिला अपराध को एक अलहदा संवेदनशीलता से देखने की ताक़त दी। इसलिए इन कविताओं को संवेदना के अलावा यथार्थ के चश्मे से भी देखना होगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवर्तिका के लिए औरत टीले पर तिनके जोड़ती और मार्मिक संगीत रचती एक गुलाबी सृष्टि है और सबसे बड़ी त्रासदी भी। वह चूल्हे पर चाँद-सी रोटी सेंके या घुमावदार सत्ता सँभाले—सबकी आन्तरिक यात्राएँ एक–सी हैं। इस ग्रह के हर हिस्से में औरत किसी–न–किसी अपराध की शिकार होती ही है। ज़्यादा बड़ा अपराध घर के भीतर का, जो अमूमन ख़बर की आँख से अछूता रहता है। ये कविताएँ उसी देहरी के अन्दर की कहानी सुनाती हैं। यहाँ मीडिया, पुलिस, क़ानून और समाज मूक है। वो उसके मारे जाने का इन्तज़ार करता है और उसके बाद भी कभी–कभार ही क्रियाशील होता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवर्तिका की कविता की औरत थक चुकी है पर विश्वास का एक दीया अब भी टिमटिमा रहा है। दु:ख के विराट मरुस्थल बनाकर देते पुरुष को स्त्री का इससे बड़ा जवाब क्या होगा कि मारे जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद वह मुस्कुराकर कह दे—‘थी.हूँ..रहूँगी...’।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285557731479,"sku":"9788126722327","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126722327.webp?v=1769283747","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/thee-hoon-rahoongi-9788126722327","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}