{"product_id":"trishanku-rashtra-smriti-swa-aur-samkalin-bharat-9789388753500","title":"Trishanku Rashtra : Smriti, Swa Aur Samkalin Bharat","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Deepak Kumar | Tr. Ganpat Teli\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eआज़ादी के सत्तर साल बाद आज भारत हमें जिस रूप में प्राप्त होता है, वह विडम्बनाओं और विरोधाभासों का कहीं से सिला, कहीं से उधड़ा एक जटिल ताना-बाना है। उसका कोई एक रूप नहीं है। विस्तृत भूभाग और इतिहास में दूर तक फैली सांस्कृतिक जड़ों के चलते उसे समझना यूँ भी सहज नहीं है। आज़ादी के बाद बने राष्ट्र के रूप में वह और पेचीदा हुआ है। यहाँ अगर आधुनिकता अपने शुद्धतम रूप में दिखती है तो परम्पराओं की जकड़बन्दी भी उतनी ही कसी हुई है। विकास है तो भ्रष्टाचार भी है, बहुरंगी विविधता में सहअस्तित्व और सहिष्णुता की भावना चमत्कृत करती है तो साम्प्रदायिकता और जातिवाद की भयावह अकुलाहट डराती भी है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘त्रिशंकु राष्ट्र’ भारतीय अस्मिता की इसी पहेली को समझने की कोशिश है। निजी और ऐतिहासिक स्मृतियों को व्यापक सामाजिक और सभ्यतागत सन्दर्भों में विश्लेषित करते हुए लेखक ने स्वातंत्र्योत्तर भारत का एक दिलचस्प ख़ाका तैयार किया है जिसमें हम, जाति, धर्म, साम्प्रदायिकता, प्रशासन, भ्रष्टाचार, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति आदि का गहरा विश्लेषण पाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eदुर्लभ वाग्विदग्धता के साथ अपने और आसपास के संस्मरणों के आईने से यह किताब भारतीय उपमहाद्वीप के वृहत्तर जीवन की विभिन्न तहों को उघाड़ती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285597577367,"sku":"9789388753500","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789388753500.webp?v=1769283838","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/trishanku-rashtra-smriti-swa-aur-samkalin-bharat-9789388753500","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}