{"product_id":"tumhara-nanoo-9789394902336","title":"Tumhara Nanoo","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Namwar Singh | Ed. Samiksha Thakur\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘तुम्हारा नानू’ में नामवर सिंह के अपनी बेटी समीक्षा ठाकुर को लिखे पत्रों को संकलित किया गया है। ये पत्र 1986 से 2005 के बीच लिखे गए थे और इनका उद्देश्य यात्राओं में अपने देखे स्थलों और अन्य अनुभवों से अपनी बेटी को परिचित कराना था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइन पत्रों को संकलित करते हुए समीक्षा जी उनकी रोज़-रोज़ की यात्राओं और व्यस्तताओं का हवाला देते हुए बताती हैं कि वापस घर आने पर वे रस ले-लेकर वहाँ के बारे में बताते और चाहते कि बेटी भी उन जगहों को देखे। इसीलिए बाद में उन्होंने अपनी देखी-जानी चीजों को पत्रों में लिखना शुरू कर दिया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपत्रों की अपनी एक उष्मा होती है, जो अब मोबाइल और मेल के ज़माने में दुर्लभ है। इन पत्रों को पढ़ते हुए हम वह उष्मा भी महसूस करते हैं, और नामवर सिंह की दृष्टि की बारीकी से भी परिचित होते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक में समीक्षा ठाकुर लिखित दो आलेख भी शामिल किए गए हैं। इनमें उन्होंने अपने पिता नामवर, हिन्दी के महान आलोचक नामवर, सबके चहेते नामवर, और वक्ता नामवर के साथ नामवर जी के जीवन के कई पहलुओं पर रौशनी डाली है। एक पठनीय और संग्रहणीय पुस्तक‍!\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285695619223,"sku":"9789394902336","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789394902336.webp?v=1769284091","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/tumhara-nanoo-9789394902336","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}