{"product_id":"udasi-koi-bhav-nahin-hai-9788119989645","title":"Udasi Koi Bhav Nahin Hai","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Raj Kumar Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराज कुमार सिंह का कविता-संग्रह ‘उदासी कोई भाव नहीं है’ एक इंसान के भीतर मौजूद भावनाओं के अथाह सागर को समझने और उसे शब्दों में बाँधने का प्रयास है। यह उनकी दूसरी पुस्तक है। इस कविता-संग्रह में जीवन के कठोर यथार्थ, आम आदमी के संघर्ष, निराशा, प्रेम और उम्मीद को नए प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। राज कुमार सिंह जब प्रेम की बात कहते हैं तो परंपरागत प्रेम कविताओं से हटकर वहाँ भी उनका कुछ अलग नजरिया होता है, मसलन—‘जब तुम कहती हो सब ठीक है\/तब मुझे लगता है अभी कितना कुछ ठीक होना बाकी है...’ या फिर—‘प्रेम को प्रेम ही खा जाता है...’\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eबात जब आम आदमी के संघर्ष की हो तो कुछ बेहद  सशक्त कविताएँ देखने को मिलती हैं, जैसे—‘युद्ध के मैदान में खड़ा हुआ, प्रत्यंचा पर स्वयं मैं चढ़ा हुआ...’ इन सबके बीच आशा का एक दीपक भी उनकी कई कविताओं में अपने पूरे तेज के साथ रोशन दिखाई देता है। कहते हैं—‘एक बड़े शहर में, जब जब एक अजनबी, एक अजनबी से पूछता है कोई पता, तब तब यह भरोसा बनता है, कि दुनिया में खोई हुई सबकी चीजें, एक दिन उन्हें मिल जाएँगी।’\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकविता-संग्रह में महात्मा बुद्ध से लेकर हिरण्यकश्यप तक को प्रतीक बनाकर लिखी कविताएँ हैं जो आज के दौर में भी महत्त्वपूर्ण हैं। पेशे से पत्रकार राज कुमार सिंह की कविताओं की खूबी बिना किसी शोर-शराबे और बिना चीख-चिल्लाहट के अपनी बात कहना है। समाज को नजदीक से देखने का जो अनुभव एक पत्रकार के रूप में उन्हें मिला है, उसका असर भी इस पुस्तक में देखने को मिलता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285582176407,"sku":"9788119989645","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119989645.webp?v=1769283803","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/udasi-koi-bhav-nahin-hai-9788119989645","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}