{"product_id":"upanishadon-ki-kahaniyan-9788180313523","title":"Upanishadon Ki Kahaniyan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rampratap Tripathi Shastri\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eउपनिषदों का दूसरा नाम ‘रहस्यविद्या’ बतलाया गया है। उपनिषदें वह रहस्यविद्या हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय संस्कृति की सभी विचारधाराओं को जीवन-दान करती हैं। वे इतनी रहस्यमयी हैं कि उनका सर्वस्व जानने का अधिकारी कोई एक व्यक्ति कभी नहीं रहा। यदि कोई एक ऐसा व्यक्ति रहा भी हो तो उसका मत ही सर्वमान्य नहीं रहा। इस ‘रहस्यविद्या' को जानने का अधिकार प्राप्त करने के लिए 'नचिकेता' के समान सर्वस्व त्याग करना पड़ता था। उपनिषदों में उस काल की अध्यात्म एवं दर्शन-सम्बन्धी सामग्रियों के भव्य चित्र ही नहीं सँजोए गए हैं, प्रत्युत भारतीय जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं का गम्भीर विवेचन भी उनमें किया गया है। मानव-जीवन में ही नहीं, इस निखिल विश्व में व्याप्त सत्य की जिज्ञासा एवं उसके अन्वेषण के लिए उपयोगी साधन की ऐसी उत्कट उत्कंठा उनमें व्यक्त है, जो विश्व के विस्तृत वाङ्‌मय में अन्यत्र दुर्लभ है। मानवीय प्रतिभा एवं पहुँच का इनसे बढ़कर कोई दूसरा उदाहरण इस रूप में अभी तक नहीं बन सका है। सचमुच, मानव की उत्कृष्ट कल्पना का ऐसा शाश्वत एवं कल्याणकारी रूप विश्व-साहित्य में अभी तक दूसरा नहीं दिखाई पड़ता। यही कारण है कि आर्य धर्म न माननेवाले भी उन पर तन-मन से निछावर हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउपनिषदों में दी गई शिक्षाओं में वह दिव्य तेज़ है जिसे व्यावहारिक रूप में लाकर कोई भी व्यक्ति, कोई भी समाज अवनति के गर्त में कभी नहीं गिर सकता, प्रत्युत् दुःख-दैन्य से छुटकारा पा सकता है। विद्वेश और घृणा की आग से उसे कोई भय नहीं हो सकता और न भौतिक अभाव के कारण उसे दर-दर भटकना ही पड़ेगा। काम-क्रोधादि विकारों को दूर करने की इनमें अमोघ शक्ति है, आत्म-ज्योति को पहचानने के लिए इनसे बढ़कर कोई दूसरा साधन नहीं है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउपनिषदें शाश्वत ज्ञान की अक्षय भंडार हैं। सारे संसार में ऐसा कोई दर्शन नहीं है, विचारधारा नहीं, जो इनसे प्रभावित नहीं हुई है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्तक में उन्नीस कहानियाँ संगृहीत हैं। इनकी भाषा में सरलता लाने की चेष्टा की गई है तथा कुछ महत्त्वपूर्ण अवतरण बढ़ा दिए गए हैं जिससे पुस्तक की उपयोगिता और बढ़ गई है। आशा है, प्रस्तुत संस्करण छात्रों, शोधार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285626740887,"sku":"9788180313523","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180313523.webp?v=1769283914","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/upanishadon-ki-kahaniyan-9788180313523","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}