{"product_id":"vande-mataram-9788126715305","title":"Vande Mataram","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Savyasachi Bhattacharya\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराष्ट्रगान ‘वंदे मातरम्’ आरम्भ से ही विवाद के केन्द्र में है। इसकी रचना, लोकप्रियता और विवाद तीनों का इतिहास एक ही है। इतिहासकार और समाजशास्त्री सब्यसाची भट्टाचार्य ने ‘वंदे मातरम्’ पुस्तक में इसी इतिहास-कथा को सिलसिलेवार और सप्रमाण बतलाने का सार्थक यत्न किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eबंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन् 1870 के दशक के शुरुआती वर्षों में इसे वंदना-गीत के रूप में रचा। 1881 में इसे उपन्यास ‘आनन्दमठ’ में शामिल किया गया। कथा-सन्दर्भ के भीतर इस गीत ने विस्तृत रूपाकार में हिन्दू-युद्धघोष का रूप धारण कर लिया। सन् 1905 में बंगाल के आन्दोलन ने इस गीत को राजनीतिक नारे में तब्दील कर दिया। कहा जाता है कि जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में इसे पहली बार गाया। 1920 तक विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर यह राष्ट्रीय हैसियत पा चुका था। 1930 में गीत के बिम्ब-विधान, व्यंजना और बुतपरस्ती को लेकर व्यापक विरोध हुआ। सन् 1937 में गीत के उन अंशों को छाँट दिया गया, जिनको लेकर आपत्तियाँ थीं तथा शेषांश को राष्ट्रगान के रूप में अपना लिया गया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eविभिन्न समय और सन्दर्भों में गीत के ‘पाठ’ और ‘पाठक’ के बीच जारी संवाद में निरन्तरता और परिवर्तन को जानना इस पुस्तक का सबसे दिलचस्प पहलू है। लेखक इसमें संवाद की ऐतिहासिकता को रेखांकित करता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285637390487,"sku":"9788126715305","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126715305.webp?v=1769283941","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vande-mataram-9788126715305","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}