{"product_id":"ve-aankhein-9788180316081","title":"Ve Aankhein","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Bimal Mitra\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eइस संसार में कोई भी ऐसा नहीं है जो पूरे विश्वास के साथ कह सके\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eकि वह सुखी है। जो ऐसा कहता है\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eवह या तो जान-बूझकर झूठ बोलता है या फिर उसे समझ ही नहीं है कि सुख क्या होता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस कथा-पुस्तक की केन्द्रीय विषयवस्तु यही है। अविनाश दा की कविताओं से शब्द की महत्ता का पाठ पढ़कर कथानायक जीवन की कथा कहने बैठता है जिसमें उसके पास-पड़ोस से लेकर दिल्ली-मुम्बई तक फैले पात्रों के दु:ख-कर्म शामिल हैं। इतिहास जिस तरह आगे बढ़ता है\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eआदमी का जीवन भी छोटे रूप में उसी तरह ऊपर-नीचे होता हुआ बढ़ता रहता है। उसमें तरह-तरह के बदलाव आते हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eकई बार तो ऐसे कि कुछ अन्तराल के बाद उनसे मिलो तो जैसे पहचानना ही मुश्किल हो जाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअलग-अलग कथा-सूत्रों के माध्यम से बिमल मित्र यहाँ जीवन और साहित्य के रिश्ते पर\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eमनुष्य की विचित्र नियति पर\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसमाज के मुखौटों पर अलग-अलग कोणों से दृष्टिपात करते हैं। अविनाश दा\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसत्य सुन्दर और मिसेज राय\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eअशेष दत्त\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eमुकुल राय जैसे पात्रों की इन कहानियों में जीवन के कई चित्र ऐसे हैं जो इस संसार के प्रति प्रेम भी जगाते हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eमोह भी और वितृष्णा भी।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285618516119,"sku":"9788180316081","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180316081.webp?v=1769283957","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/ve-aankhein-9788180316081","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}