{"product_id":"vedkaleen-striyan-9789380186030","title":"Vedkaleen Striyan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Madhukar Ashtikar\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: Hinduism - General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eआज के वैज्ञानिक युग में स्त्री को मुक्‍त, स्वतंत्र तथा जागरूक होना चाहिए। रूढि़याँ और परंपराएँ उसके विकास के रास्ते में बाधक नहीं होनी चाहिए। परंतु समाज रचना की कुछ असंतुलित धारणाओं के कारण आज भी स्त्री कुछ अवांछनीय बंधनों में बँधी दिखाई देती है। अत: वेदकालीन स्त्रियों के चरित्रों के माध्यम से तत्कालीन समाज-व्यवस्था में स्त्रियों से संबंधित धारणाओं, रूढि़यों तथा परंपराओं का अवलोकन करना कदाचित् उपयोगी सिद्ध होगा।प्रस्तुत पुस्तक में वेदकालीन स्त्रियों के जीवन-चरित्र से स्पष्‍ट होता है कि वेदकाल में स्त्रियों को विशेष प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त थी। धर्म, राजनीति, ज्ञान-विज्ञान एवं समाज-व्यवस्था आदि सभी क्षेत्रों में स्त्री को पुरुष के समान महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्‍त था। कुछ मामलों में तो उसे पुरुष से अधिक प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त थी।आज के ‘स्त्रीमुक्‍त‌ि आंदोलन’ एवं स्त्री कल्याणेच्छुक शासन के लिए ये वेदकालीन स्त्री-चरित्र अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। वर्तमान हालात में स्त्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए स्त्रियों का शिक्षित, संस्कारित तथा जागरूक होना आवश्यक है।आशा है, वेदकालीन स्त्री-चरित्रों के पठन, मनन और चिंतन से स्त्रियों को स्वतंत्रता, सुख-संतोष और सफलता प्राप्‍त होगी तथा पुरुष वर्ग को सामंजस्य, धैर्य और निर्णय-शक्‍त‌ि आदि गुण प्राप्‍त होंगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46839666638999,"sku":"9789380186030","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789380186030.webp?v=1769162052","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vedkaleen-striyan-9789380186030","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}