{"product_id":"vigyapan-bazar-aur-hindi-9789388211680","title":"Vigyapan Bazar Aur Hindi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Kailash Nath Pandey\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: [\"[\"Media Studies\"]\"]\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eविज्ञापनों का खासा असर शुरूआती दौर में अहिस्ता-अहिस्ता किन्तु कालान्तर में धूम-धड़ाके के साथ भारतीय समाज में गोरे तक पसर चुका है । साफ शब्दों में, तमाम दर्जनों लांछनाओँ के बावजूद आज हम विज्ञापनों के जिस मायावी संसार का सामना कर रहे हैं, उससे बचना हमारे लिए मुस्रिकल हो गया है । एक और अभिव्यक्ति के अधिकांश मंच-मचान और माध्यमों से इसका अटूट रिस्ता स्थापित हो चुका है तो दूसरी ओर यह संप्रेषण की मुकम्मल, पुख्ता और आकर्षक विधा और माध्यम तो बन ही गया है । अब यह व्यावसायिक शक्ति, विक्रय कला की प्रणाली, लोकसेवा, घोषणा, उपभोक्ता के लिए सूचना और सुझाव, व्यावसायिक जरिया और क्रय शक्ति के सम्बर्धक के रूप में अपनी सार्थकता सिद्ध कर रहा है । विज्ञापनों के बिना, बिलाशक बाजार चल नहीं सकता । बाजार को यह सुसम्पन्न और लुभाना बनाता है, उसे सजाता और साधना है । बिना इसके मीडिया के सामने अस्तिव का संकट पैदा हो सकता है । इसने भाषा, संस्कृति के साथ को जरा, उसकी जीवन शैली, ढंग और उब को भी बदल दिया है ।.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716903157911,"sku":"9789388211680","price":595.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789388211680.webp?v=1776940642","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vigyapan-bazar-aur-hindi-9789388211680","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}