{"product_id":"vikasit-bihar-ki-khoj-9788173159220","title":"Vikasit Bihar Ki Khoj","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nitish Kumar\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: Public Policy - City Planning \u0026amp; Urban Development\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसन‍् 1957 में प्रधानमंत्री नेहरू ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में लोकसभा में कहा था-' ' बोलने के लिए वाणी की जरूरत होती है, किंतु मौन के लिए वाणी और विवेक दोनों की जरूरत पड़ती है। '' बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के विषय में भी शायद पंडित नेहरू का यह वाक्यांश सटीक बैठता है।मुख्यमंत्री नीतीश बाबू चाहे प्रतिपक्ष में रहे या पक्ष में, सदन के एक-एक पल का उपयोग किया, ताकि संसदीय जनतंत्र मजबूत हो एवं जन- भागीदारी का यह मुखर मंच अपने मकसद में कामयाब हो। वे कर्पूरी ठाकुर की राजनीति के कायल रहे हैं। उन्होंने राजनीति में सिद्धांतों और मूल्यों की पैरवी की और इन्हें सही मायनों में अपनाया भी। यह कहना अतिशयोक्‍ति नहीं होगी कि उनके कार्यकाल में बिहार राज्य का कायाकल्प हो गया है।प्रस्तुत पुस्तक में नीतीश बाबू के बहुआयामी व्यक्‍तित्व एवं कार्यों का विवेचन किया गया है। एक राजनेता के रूप में वे अपनी वाणी से कुछ न कहकर अपना उत्तर रचनात्मक कार्यो के रूप में देते हैं। उनकी मान्यता है कि सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्‍ति तक पहुँचे।राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता का प्रमाण देनेवाले इन लेखों से आम आदमी का राजनीतिज्ञों में और विकास के कामों में विश्‍वास बढेगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839477502103,"sku":"9788173159220","price":245.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788173159220.webp?v=1769160748","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vikasit-bihar-ki-khoj-9788173159220","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}