{"product_id":"vyangyaya-ke-rang-9788177211238","title":"Vyangyaya Ke Rang","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ashok Gujarati\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eव्यंग्य के रंग—अशोक गुजरातीमोबाइल पर धुन बजी—‘हैलो!’ उधर से तीर चला—‘मोहन है क्या?’ मैं चौंका— ‘मोहन... यहाँ कोई मोहन नहीं है!’ उन पर कोई असर नहीं—‘आपका फोन नंबर क्या है?’ मुझे गुस्सा आ गया—‘राँग नंबर!’ लेकिन वे पीछा छोड़ने को तैयार नहीं—‘आप कौन बोल रहे हैं?’ मन हुआ, कहूँ—‘तेरा बाप!’ परंतु सभ्यता का तकाजा था, फोन बंद कर दिया। अब मैंने प्रिंटिंग प्रेस को लगाया। घंटी बजती रही तो घर पर मिलाया। पूछा, ‘प्रकाशजी हैं क्या?’ स्वर उभरा—‘कहिए क्या काम है, मैं उनका भाई बोल रहा हूँ।’ मेरी जिज्ञासा—‘मेरे कार्ड छप गए क्या?’ उनकी प्रतिजिज्ञासा—‘आपको कौन सी तारीख बताई थी?’ मैंने खुलासा किया—‘तारीख तो कल हो गई’। उन्होंने आश्चर्य जताया—‘ऐसा क्या! फिर छप गए होंगे।’ मुझे खुशी हुई—‘तो मैं लेने आ जाऊँ?’ उन्होंने पानी फेर दिया—‘भई, यह तो आपको प्रकाश से ही पूछना पड़ेगा। वह मुंबई गया है। मेरी अलग दुकान है कपड़ों की।’—इसी संग्रह सेसात्त्विक, जीवंत एवं रोचक शैली में लिखे अशोक गुजराती के ये व्यंग्य लेख बड़ी-से-बड़ी बात को सहज एवं मारक रूप में कह देने की क्षमता रखते हैं। ये व्यंग्य पाठक को गुदगुदाते ही नहीं, भरपूर मनोरंजन भी करते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839479828631,"sku":"9788177211238","price":280.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788177211238.webp?v=1769160780","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vyangyaya-ke-rang-9788177211238","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}