{"product_id":"vyasparva-9789360862268","title":"Vyasparva","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Durga Bhagwat\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमहाभारत भारतीय मनीषा की ऐसी पूँजीभूत अभिव्यक्ति है कि इसके बारे में यह कथन अतियुक्ति नहीं लगती कि जो कुछ भारत में है वह सब महाभारत में है, और जो इसमें नहीं है वह कहीं नहीं है। आश्चर्य नहीं कि ऐसे महाग्रन्थ का अध्ययन, मनन और उसकी व्याख्या किसी के लिए भी आसान नहीं है। उसके सामाजिक आशय के सम्यक स्वरूप को पहचानना अथवा विशद रूप में समझाना तो और भी कठिन है। इस कठिनाई के प्रत्युत्तरस्वरूप, मराठी भाषा की प्रमुख चिन्तक-साहित्यकार दुर्गा भागवत ने इस पुस्तक में, महाभारत के सत्य को उसके प्रमुख पात्रों के ज़रिये अत्यन्त सहज और लालित्यपूर्ण ढंग से व्याख्यायित किया है। ‘व्यासपर्व’ गहन चिन्तन और ललित अभिव्यक्ति के सहज सामंजस्य से निर्मित कृति है जिसमें विदुषी लेखक ने स्पष्ट किया है कि करुणा जब प्राणों में बस जाती है तभी धर्म का दर्शन होता है। उन्होंने इस जीवन-सत्य की ओर भी संकेत किया है कि मनुष्य मूलतः मनुष्य है; उसका लक्ष्य भी मनुष्य ही है। श्रीकृष्ण, भीष्म, द्रोण, गान्धारी, अश्वत्थामा, अर्जुन, दुर्योधन, कर्ण, विदुर, द्रौपदी, एकलव्य आदि की अद्भुत झाँकी इस पुस्तक में साकार उपस्थित हुई है जिनमें व्यक्तित्व और इतिहास ही नहीं, हमारा समय भी मुखरित होता है। निःसन्देह ‘व्यासपर्व’ भारतीय संस्कृति की एक बहुआयामी व्याख्या है। यह कृति गद्य भी है और काव्य भी, जो ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ के समन्वित स्वरूप को उद्भासित करती है। बार-बार पढ़ने और संग्रह करने योग्य एक अनुपम पुस्तक।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47929320210583,"sku":"9789360862268","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360862268.webp?v=1781763054","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/vyasparva-9789360862268","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}