{"product_id":"wo-rain-lili-khilane-ke-din-the-9789360861230","title":"Wo Rain Lili Khilane Ke Din The","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Kavita\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e वो रेन लिली खिलने के दिन थे\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e कथाकार कविता की नयी कहानियों का संकलन है। अति-सम्प्रेषण और अकेलेपन से भरे सोशल मीडिया के इस समय में ये कहानियाँ समकालीन स्त्री-अनुभव की उस सघन और जटिल दुनिया में प्रवेश करती हैं, जहाँ निजी जीवन, सामाजिक संरचनाएँ और समय की नई चुनौतियाँ एक-दूसरे से लगातार टकराती रहती हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e संवाद के संकट को सूक्ष्मता से पकड़ती ये कहानियाँ विवाह और परिवार जैसी संस्थाओं को चेतना और निर्णय के संयुक्त धरातल पर पुनर्परिभाषित करने का प्रयास करती हैं और स्त्री के सम्मान और पहचान जैसे जटिल राजनैतिक प्रश्नों को दैनिक जीवन की छोटी-छोटी स्थितियों में गहरे उतरकर सम्बोधित करती हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e कविता इन कहानियों में बाहरी घटनाओं से अधिक उस भीतरी भूगोल को रेखांकित कर रही हैं, जहाँ स्त्री का मन, स्मृति और विवेक सामाजिक संरचनाओं से निरन्तर संवाद और संघर्ष में रहते हैं। यह उस नई बनती स्त्री की दुनिया है जो स्वयं को किसी एक भूमिका में सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अपने लिए नए अर्थ और नए रास्ते तलाश कर रही है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e संग्रह की कुछ कहानियों में महामारी के दौर का विस्थापन, भय और असुरक्षा भी दर्ज है, जहाँ पीड़ा है, अनिश्चितता है, मृत्यु है लेकिन उसके समानान्तर जीवन को थामे रखने की जिद भी है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e प्रवाहमान और सघन स्त्री-भाषा में रची गई ये कहानियाँ एक नए और सम्भावनाशील समाज की ओर संकेत करती हैं, खासकर स्त्री के सन्दर्भ में।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716887593111,"sku":"9789360861230","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360861230.webp?v=1776940565","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/wo-rain-lili-khilane-ke-din-the-9789360861230","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}