{"product_id":"yadon-ka-shantiniketan-9789352295883","title":"Yadon Ka Shantiniketan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Manorama Bishwal Mohapatra\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकविता से हम बराबर यह उम्मीद करते हैं कि वह हमारे जीवन को उसकी सारी रंगतों, छवियों, विडम्बनाओं और अन्तर्विरोधों में विन्यस्त करे। हम जानते हैं कि कविता से जीवन हमेशा बड़ा है : कविता उसे कभी पूरी तरह से समो नहीं सकती। फिर भी, हम कविता से उम्मीद करते हैं कि वह ऐसा करने का असम्भव उद्यम करे। जब कोई नया या अतिथि कवि हमारे सामने आता है तो हमारी उत्सुकता होती है यह जानने की कि उसने अपनी कविता में किस तरह का जीवन खोजा-पाया, बसाया रचा है।श्रीमती मनोरमा विश्वाल महापात्र की कविता का पहला आकर्षण यही है कि उनकी आधुनिकता ने अपने मूल अंचल की स्थानीयता, स्मृतियों और ऐन्द्रिकता को न सिर्फ़ सहेजा है, बल्कि जीवन को देखने और बखान करने का उपकरण बनाया है। उनके यहाँ निविड़ता में 'खुले आकाश का गीत ' सुना जाता है और बस एक करुण सूर्यास्त थिरक जाता है\/घर के नक्शे पर। वे उस गाँव-घर को बार-बार कविता में याद करती और सजीव करती हैं, जिसकी ज़िन्दगी भरपूर मधुछत्ते की तरह थी। सौभाग्य से उनमें शून्यता का साक्षात् करने और मृत नदी के तट पर जाने का साहस भी है। उनकी स्मृतियाँ निजी नहीं पौराणिक और ऐतिहासिक भी हैं।इस हिन्दी अनुवाद से मनोरमा जी का हिन्दी में काव्य- प्रदेश स्वागत के योग्य है। इस सच्चाई का एक बार फिर इज़हार है कि हम भारतीय जीवन की जटिल सूक्ष्मताएँ और अपार विस्तार दोनों ही आज की कविता में पहचान सकते हैं और कविता हमारे समय में सारी आपाधापी के बावजूद जिजीविषा की एक स्पन्दित विधा है।—अशोक वाजपेयी★★★सप्तपर्णी केवल शान्तिनिकेतन ही में खिलता है। सुनहरे फूलों से जब मण्डित हो जाता है शान्तिनिकेतन।बचपन, बचपन की भाँति महकने लगता है। संगोष्ठी, कविता-उत्सवसब आज के उपलक्ष्य मेंअतीत के छात्रावास केझरोखे के पासटगर, तराट फूल के वृक्षों की छाया सब कुछ पा लिया है की भावना का देश है शान्तिनिकेतन।सप्तपर्णी फूल बस शान्तिनिकेतन ही में खिलता है।उस दिन मयूराक्षी के जल-भँवर मेंखो गये समय केसभी अच्छे दिनमैं एक पत्र के समानबह चली दूर से दूरतर।(इसी पुस्तक से)\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523097481367,"sku":"9789352295883","price":192.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789352295883.webp?v=1767179993","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/yadon-ka-shantiniketan-9789352295883","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}