{"product_id":"yah-hamara-samay-9788126723287","title":"Yah Hamara Samay","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nand Chaturvedi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eइधर हिन्दी का गद्य-लेखन समृद्ध और सामाजिक जड़ता तथा रूढ़ियों पर अधिक उग्रता से प्रहार करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ नज़र आता है। आज़ादी के लिए संघर्ष करते राष्ट्र-नायकों ने ‘समता और स्वतंत्रता’ के जिन दो महान लक्ष्यों को पाने का संकल्प किया, उन्हें धूमिल न होने का उत्साह हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का केन्द्र है। मैंने इस पुस्तक में संकलित आलेखों में ‘समता और स्वतंत्रता’ के लिए अपनी प्रतिबद्धता को ‘पुनरावृत्ति’ की सीमा तक अभिव्यक्त किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस संकलन में उन्हीं सब सन्दर्भों और परम्पराओं को खँगाला गया है जो समता के विचारों और पक्षों को मज़बूत करती हैं। ‘धर्म’ के उसी पक्ष को बार-बार रेखांकित किया है जो धर्म के स्थूल, बाहरी कर्मकांड को महत्त्वहीन मानता है लेकिन जो संवेदना के उन सब चमकदार पक्षों को शक्ति देता है जो सार्वजनिक जीवन को गरिमामय बनाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक में अर्थ और बाज़ार केन्द्रित व्यवस्था के कारण हुई बरबादियों का बार-बार ज़िक्र हुआ है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक में कई विषयों पर लिखे आलेख हैं जिनमें समय के दबावों, उनको समता और स्वतंत्रता के वृहत्तर उद्देश्यों में बदलनेवाले आन्दोलनों की चर्चा है। ‘समता’ ही केन्द्रीय चिन्ता है जिसे अवरुद्ध करने के लिए विश्व की नई पूँजीवादी शक्तियाँ अपने सांस्कृतिक एजेन्डा के साथ जुड़ी हुई\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eये आलेख किसी ‘तत्त्ववाद’ की भूमिका नहीं हैं। ये उन चिन्ताओं की अभिव्यक्ति और साधारणीकरण हैं जो भारत के जनजीवन से जुड़ी और भविष्य के विकास की सम्भावनाएँ हैं। भारत की समृद्धि ‘समता और स्वतंत्रता’ की परम्पराओं से जुड़ी है; यह बताना इस पुस्तक का प्रयोजन है। आलेख ‘निराशा का कर्तव्य’ डॉ. राममनोहर लोहिया का है। मैंने उसका प्रस्तुतिकरण किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—भूमिका से\u003c\/p\u003e\n\u003ch1\u003e\u003cstrong\u003e \u003c\/strong\u003e\u003c\/h1\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285667569815,"sku":"9788126723287","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126723287.webp?v=1769284018","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/yah-hamara-samay-9788126723287","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}