{"product_id":"yalgar-9789389563733","title":"Yalgar","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Sharankumar Limbale\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eयह कविता बॉम्बस्फोट का सच हैं!खूनी है यह कविता!खेतों की इन मेंड़ों कोकारावास की इन दीवारों कोशीशमहल की इन खिड़कियों कोपता नहीं है मेरे शब्दों में का सन्तप्त सौन्दर्य ?ये तूफ़ान मेरे घमण्डी प्रश्वास से उठते हैंमेरे हुंकार से प्रलय प्रसारित होती हैशोषितों के कण्ठ-कण्ठ में!मेरी सख्त कलाई से इस देश का नया चेहरा उभर रहा हैमेरे शब्द-शब्द में सजा है नया इतिहासइन शब्दों में दबोचा हुआ एक दुख हैइन अक्षरों में एक खण्डित सुख है।शब्दों पर फैल रहा है अर्थ कोड़ों-साअक्षरों में से शब्द फैल रहे हैं।लैस की गयी बन्दूक़-सेमेरे आसपास का धधकता असन्तोषमुझे ही प्रज्वलित कर रहा है क़लम में सेकल के सन्दर्भ के लिए!मेरे पैरों तले जल रही रेत औरआसमान आँसू टपका रहा हैमैं भयभीत हूँ किसी अनाहूत डर से लेकिनसधी हुई लापरवाही से ।बोल रहा हूँ कल के बारे में!कल मैं रहूँगा नहीं रहूँगा।लेकिन कल के अपने स्वागत हेतुअपने ये शब्द-फलअपने शिलालेख के रूप में छोड़े जा रहा हूँ।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523114061975,"sku":"9789389563733","price":228.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389563733.webp?v=1767180084","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/yalgar-9789389563733","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}