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Kala Ka Saundarya Sahitya Tatha Anya Kalayen

by Yatindra Mishra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181438881
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 635
  • Original Price: INR 2000.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 2300 grams
  • BISAC Subject(s): History / General

कला का सौन्दर्य - खण्ड एक -थाती का खण्ड १ 'कला का सौन्दर्य' साहित्य तथा अन्य कलाएँ हमारे देश की परम्परा को कई आयामों में दिखाता है। इसी का अनुसरण, अन्वेषण व पुनर्पाठ करने के लिए और उस सांस्कृतिक अवगाहन में भीतर तक जाकर अपनी विरासत को पहचानने के लिए यह पुस्तक पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की बुनावट की तरह है जिसमें गणपति के मंगल आह्वान से लेकर देव-पितृ, ऋषि-राक्षस, सन्ध्या-रात्रि, पशु-पक्षी, वनस्पतियों औषधियों, कीड़े-मकौड़ों, नदी-पर्वत, इष्ट-मित्र सभी के प्रति सहृदय होने का भाव छिपा है। पुस्तक कला के उच्च आयामों को प्रेरणा की तरह सुधि पाठकों के सामने लाती है। कला का सौन्दर्य - खण्ड दो -थाती का खण्ड २ 'कला का सौन्दर्य' साहित्य तथा अन्य कलाएँ हमारे देश की कला और साहित्य परम्परा को कई नवीन आयामों में दिखाता है। पुस्तक में साहित्य और कला संसार के कई दिग्गजों ने अपना रचनात्मक योगदान दिया है। यह योगदान भाषा, विचार, सम्प्रेषण और कला की सम्वेदना को एक साथ पाठकों के समक्ष रखता है। थाती का यह अंक अनेक मायनों में महत्वपूर्ण है। यह कला के सान्निध्य के साथ उत्पन्न हुई सहनशीलता के पक्ष में तो खड़ा है लेकिन शक्ति और सत्ता को अस्वीकार करने की विचारधारा रखने वाले रचनाकारों और कलाकारों की सांस्कृतिक उज्जवलता भी दिखाता है। कला का सौन्दर्य - खण्ड तीन - थाती का खण्ड ३ 'कला का सौन्दर्य' साहित्य तथा अन्य कलाएँ हमारे देश की कला और साहित्य परम्परा को कई नवीन आयामों में दिखाता है और यह भी कि कला का धर्म हर हाल में सर्वश्रेष्ठ है। इस खण्ड में कहानियों, कविताओं और विमर्श के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को पाठकों को सौंपने का प्रयास किया गया है। जिस समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा को हम पोसते हैं उसे धर्म, जाति-प्रथा और किसी अलोकतान्त्रिक वजह से हमें कभी खोना नहीं चाहिए, पुस्तक का यह खण्ड इस विचार के साथ पाठकों के समक्ष आता है।कला का सौन्दर्य - खण्ड चार -थाती का खण्ड ४ 'कला का सौन्दर्य' साहित्य तथा अन्य कलाएँ हमारे देश की कला और साहित्य परम्परा को उच्च सतरीय सम्प्रेषण द्वारा व्यवस्थित रूप में इस पुस्तक में प्रस्तुत कर रहा है। फिर चाहे वह रज़ा सरीखे चित्रकार का जीवन और कला सम्बन्धी उनके विचार हों या नाग बोडस का उपन्यास अंश हो। कविताओं में क्रान्ति हो या ताज़गी से भरी कहानियाँ हों। कला हर काल और समय में उन्मुक्त ही होती है और रहेगी भी। इस खण्ड में आलोचना और अनुवाद को भी स्थान मिला है। पुस्तक विविध सौन्दर्य को एक साथ समेटे हुए है।

यतीन्द्र मिश्र - हिन्दी कवि, सम्पादक, संगीत और सिनेमा अध्येता हैं। अब तक चार कविता-संग्रह- 'यदा-कदा', 'अयोध्या तथा अन्य कविताएँ', 'ड्योढ़ी पर आलाप' और 'विभास'; शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी पर 'गिरिजा', नृत्यांगना सोनल मानसिंह से संवाद पर 'देवप्रिया', शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ के जीवन व संगीत पर ‘सुर की बारादरी', पार्श्वगायिका लता मंगेशकर की संगीत-यात्रा पर ‘लता : सुर-गाथा' तथा बेग़म अख़्तर के जीवन और गायकी पर आधारित ‘अख़्तरी: सोज़ और साज़ का अफ़साना’ प्रकाशित। प्रदर्शनकारी कलाओं पर 'विस्मय का बखान', कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन 'भैरवी', हिन्दी सिनेमा के सौ वर्षों के संगीत पर 'हमसफ़र' विशेष चर्चित। फ़िल्म निर्देशक व गीतकार गुलज़ार की कविताओं और गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे' तथा 'मीलों से दिन' तथा अवध की संस्कृति पर आधारित गज़ेटियर ‘शहरनामा : फ़ैज़ाबाद’ सम्पादित पुस्तकें हैं। 'गिरिजा', 'विभास' तथा ‘अख़्तरी : सोज़ और साज़ का अफ़साना’ का अंग्रेज़ी, ‘यार जुलाहे' और ‘मीलों से दिन’ का उर्दू तथा अयोध्या श्रृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित। इनके अतिरिक्त वरिष्ठ रचनाकारों अज्ञेय, कुँवर नारायण और अशोक वाजपेयी पर पुस्तकें सम्पादित। राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार ‘स्वर्ण कमल', मॉमी फ़िल्म पुरस्कार, शमशेर सम्मान, रज़ा सम्मान, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, स्पन्दन ललित कला सम्मान, द्वारका प्रसाद अग्रवाल भास्कर युवा पुरस्कार, एच. के. त्रिवेदी स्मृति युवा पत्रकारिता पुरस्कार, महाराणा मेवाड़ सम्मान, हेमन्त स्मृति कविता पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित। भारतीय ज्ञानपीठ फ़ेलोशिप, संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार की कनिष्ठ शोध-वृत्ति और सराय, नयी दिल्ली की स्वतन्त्र शोध-वृत्ति प्राप्त हैं। दूरदर्शन (प्रसार भारती) के कला-संस्कृति के चैनल डी. डी. भारती के सलाहकार के रूप में कार्यरत (2014-2016)। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस और अबु-धाबी की यात्राएँ। कला मूर्धन्यों से संवाद पर आधारित आयोजन ‘संगत' (लखनऊ) के आयोजक-परिकल्पनाकार। अयोध्या में रहते हुए ‘विमला देवी फ़ाउण्डेशन न्यास' के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालक।

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