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Kayakalp

by Premchand
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788124806043
  • Binding: Paperback
  • Subject: Hindi Literature
  • Publisher: Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
  • Publisher Imprint: Peacock Books
  • Publication Date:
  • Pages: 504
  • Original Price: INR 375.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): World Literature / Asia (General), World Literature / India / General, and World Literature / India / 20th Century

कायाकल्प उपन्यास में प्रेमचंद ने पारलौकिकता, दार्शनिक चिंतन तथा मानवीय मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। राजकुमार पर्वतों में निवास करते हुए योग साधना करते हैं और ऐसे वायुयानों का आविष्कार करते हैं जो इच्छानुसार उड़ सकते हैं। प्रेमचंद ने इस काल्पनिक कथानक को पूर्वजन्म की अवधारणा से जोड़ते हुए सामाजिक और मानवीय चिंतन को गहराई से प्रस्तुत किया।

कहानी में आगरा में साम्प्रदायिक दंगों का उल्लेख है, जिन्हें गांधीवादी विचारधारा से चक्रधर शांति में बदलते हैं। ग्राम्य जीवन में जमींदारों के शोषण और जनता के विरोध को भी दर्शाया गया है। उपन्यास का मुख्य संदेश है कि सच्चा कायाकल्प बाहरी नहीं आंतरिक परिवर्तन से होता है। प्रेमचंद ने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और त्याग के महत्व को रेखांकित किया है साथ ही उन्होंने यह विचारोत्तेजक प्रश्न उठाया है कि क्या ऐसा आदर्श संसार संभव नहीं, जहाॅ मानव जाति प्रेम, शांति और आपसी सöाव के साथ जीवन व्यतीत कर सके।

मुंशी प्रेमचंद हिंदी वेफ एक महान लेऽक और उपन्यासकार थे, जिन्हें "उपन्यास सम्राट" वेफ नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लामही गाँव में हुआ। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उन्होंने समाज की कुफरीतियों, आर्थिक असमानता, जातिवाद और शोषण को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से उकेरा।

प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों और कहानियों वेफ माध्यम से समाज में सुधार और जागरूकता लाने का प्रयास किया। उनवेफ प्रमुख उपन्यासों में गोदान, गबन, सेवासदन, निर्मला, प्रतिज्ञा और कायाकल्प शामिल हैं। उनकी कहानियाँ जैसे पूस की रात, ईदगाह और नमक का दरोगा मानवीय संवेदनाओं और यथार्थ का अद्भुत चित्राण करती हैं।

उन्होंने साहित्य को एक नया दृष्टिकोण दिया और उसे आम जनमानस से जोड़ा। 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं।

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