Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Abhi Raat Baki Hai

by Jayant Pawar
Save 35% Save 35%
Current price ₹192.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
(-35%)
₹192.00
Current price ₹192.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350002223
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 122
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

‘अभी रात बाकी है...’ मुंबई की कपड़ा मिलों के मजदूरों की ऐतिहासिक हड़ताल पर लिखा गया महत्त्वपूर्ण नाटक है। मुंबई जैसे महानगर की आज की समस्याओं का वास्तविक चित्रण इसमें किया गया है। नाटक से मनोरंजन की अपेक्षा रखने वाले कुछेक को यह रौद्र, भड़कीला और भय का रोमांच खड़ा करने वाला नाटक लग सकता है। यह सब हम रोजमर्रा की जिंदगी में जीते हैं, अखबारों में पढ़ते हैं, इसका अनुभव हमें नाटक पढ़ने के पश्चात् होता है। उसे पल भर के लिए भूलकर ऐसा कुछ आनंददायी, दिल बहलाने वाला दीजिए ऐसी शिकायत भी उनमें से कुछ लोग करते हैं। इस तरह की अनेक प्रतिक्रियाएँ मैंने नाटक के मंचन के बाद विचार-गोष्ठियों में सुनी हैं। मुझे इस नाटक में मिल कामगारों की ऐतिहासिक हड़ताल दिखाई दी। आज के महानगर के सवाल दिखे। ये सब कुछ परदा खोलने और पुनः बंद होने के बीच मंच पर घटी घटनाओं और संवाद के द्वारा लगातार सामने आता है। पर उससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मैं अनजाने में ही खुद से मिला। और इसलिए मुझे यह नाटक मेरा अपना लगा। मुझे जो महसूस हुआ और जो मैं कहना चाहता हूँ, वह बहुत कुछ यह नाटक कहता है। नाटक और उसके पात्रों के रूप में जैसे मैं ही बोल रहा हूँ, ऐसा महसूस करते हुए, मैं अनजाने ही प्रेक्षागृह की कुर्सी से उठकर सीधे नाटक में कब पहुँच गया, यह मैं समझ नहीं पाया।—विजय तेंडुलकर

जयंत पवारजन्म : 22 फरवरी, 1960; मुंबई। मराठी के वरिष्ठ साहित्यकार जयंत पवार का सांस्कृतिक क्षेत्र में पत्रकारिता के माध्यम से विशिष्ट योगदान है। नाट्य-समीक्षा उनका प्रमुख पत्रकारीय क्षेत्र रहा है। आज की मराठी रंगभूमि के महत्त्वपूर्ण समीक्षकों में उनका नाम लिया जाता है।मराठी रंगमंच के नाटककारों की पीढ़ी में एक प्रमुख नाटककार के रूप में उन्होंने अपने ‘अंधातर’, ‘वंश’, ‘माझं घर’, ‘टेंगशेंच्या स्वप्नात ट्रेन’ और ‘काय डेंजर वारा सुटलाय’ आदि नाटकों के कारण विशिष्ट पहचान बनाई है। इसके अलावा उन्होंने कई एकांकियों का भी लेखन किया है। वे ‘फिनिक्सच्या राखेतून उठला मोर' कहानी-संग्रह के लिए 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित किये जा चुके हैं। कई मराठी और हिंदी फिल्मों के पटकथा-लेखक भी रहे हैं।★★★कैलाश सेंगरजन्म : 16 फरवरी, 1951; नागपुर में।शिक्षा : एम.ए., बी.एड.।अकोला (महाराष्ट्र) में मिडिल स्कूल से लेकर डिग्री कॉलेज (खामगाँव) में अध्यापन 'नवभारत टाइम्स', मुम्बई में पत्रकार भी रहे । साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़ा हुआ नाम। कहानी, गीत-नवगीत, कविता और हिंदी गजल के कई महत्त्वपूर्ण संकलन तथा आलेख। कविता के लिए 'सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पुरस्कार', 'लता मंगेशकर फिल्म-संगीत पत्रकारिता सम्मान', 'आशीर्वाद पुरस्कार' आदि पुरस्कारों से पुरस्कृत। निधन : 2021 में मुंबई में।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us