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Agra Bazar

by Habib Tanvir
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387024939
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 6th Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

हमने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या पाया है जुज़ तेरें और को समझाऊँ तो समझा न सकूँ-फैज़ अहमद 'फैज़'★★★'आगरा बाज़ार', 'मिट्टी की गाड़ी' और 'चरनदास चोर' यह तीन नाटक इसी तरतीब से मेरे रंगकर्म के सफ़र में संगे-मील हैं। यानी सन् 1954, 1958 और 1975- ये तीन साल मेरे आर्ट के इरतिक़ा (विकास) में सबसे ज्यादा अहमियत और मेरी थिएटर की ज़िन्दगी में तारीख़ी हैसियत रखते हैं। यही तीन नाटक हैं, जो कम्बल की तरह मुझसे चिपककर रह गए और बार-बार की फ़रमाइशों ने उन्हें सदाबहार बना दिया। इसके अलावा यही तीन ऐसे नाटक भी हैं, जिन्हें आलोचकों ने कुतर-भँभोड़ा। लेकिन अवाम में इनकी मक़बूलियत कम न हुई बल्कि बढ़ती ही गई। यही तीन ऐसे नाटक भी हैं, जिन्होंने अपने-अपने ढंग से मुझे वो शैली दी, जिसमें एक लिहाज़ से बाद के सारे 'प्रोडक्शनों' में मेरे दस्तख़त की सूरत अख्तियार कर ली। इन सब बातों के अलावा एक यह हक़ीकत भी क़ाबिले-ज़िक्र है कि यही तीन नाटक मेरे ख्वाब की ताबीर बर लाने में सबसे ज़्यादा मेरे मददगार साबित हुए हैं। वो ख़्वाब था-एक पेशावर थिएटर बनाना ।- भूमिका से

हबीब तनवीर का जन्म 1 सितम्बर 1923 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ। 1944 में नागपुर विश्वविद्यालय से स्नातक-उपाधि प्राप्त करने के बाद हबीब तनवीर ने 1955-56 में ब्रिटेन की 'राडा' (‘रॉयल एकेदेमी ऑफ़ ड्रामाटिक आर्टस') में अभिनय तथा एक वर्ष बाद वहीं के 'ब्रिस्टल ओल्ड विक थिएटर स्कूल' से नाट्य- -निर्मिति का अध्ययन किया। 1954 में वे दिल्ली में पहले पेशेवर नाट्यमंच की स्थापना कर चुके थे और 1959 में उन्होंने 'नया थिएटर' के नाम से एक अन्य नाट्यमंच की शुरुआत की। नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य-निदेशक तथा मंच-अभिनेता होने के साथ-साथ वे कई फ़िल्मों और टी.वी. धारावाहिकों में काम कर चुके हैं। हबीब तनवीर को ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिले हैं, उन्हें पद्मश्री, संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार, शिखर सम्मान, विश्वविद्यालय से मानद डी. लिट्., कालिदास सम्मान, उर्दू अकादेमी नाट्य पुरस्कार, साहित्य कला परिषद नाट्य पुरस्कार आदि प्रदान किये गये हैं । वे रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर में अतिथि प्राध्यापक, संगीत नाटक अकादेमी के फैलो, साहित्य अकादेमी की कार्यकारिणी के सदस्य तथा नेहरू फैलोशिप के प्राप्तकर्ता भी रहे हैं। उनके विख्यात नाटकों में आगरा बाज़ार, चरन दास चोर, देख रहे हैं नैन और हिरमा की अमर कहानी सम्मिलित हैं। उन्होंने बसन्त ऋतु का सपना के अलावा शाजापुर की शान्ति बाई, मिट्टी की गाड़ी तथा मुद्राराक्षस शीर्षकों से देशी-विदेशी नाटकों का आधुनिक रूपान्तर किया है। हबीब तनवीर के नाटकों को अनेक पुरस्कार मिले हैं जिनमें 1982 के एदिनबरा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य समारोह का ‘फ्रिज फर्स्टस' पुरस्कार भी शामिल है।देहावसान : 8 जून 2009, भोपाल (म.प्र.) ।

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