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Choupat Raja Tatha Anya Bal Natak

by Vijay Tendulkar
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387409163
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 60
  • Original Price: INR 95.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

यह तेंडुलकर द्वारा रचित ‘चौपट राजा तथा अन्य बाल नाटक’ बच्चों के लिए लिखा नाटक है। इसकी शैली अति मनोरंजक तथा भाषा अति सरल है। इसमें चिड़िया का बंगला, चौपट राजा, ताशे वाला तीन कहानियाँ संकलित हैं। नाटक लिखते समय लेखक ने बाल मनोविज्ञान का विशेष ध्यान रखा है। भाषा बाल दर्शकों को गुदगुदाने में पूर्ण सफल है साथ ही बच्चों को शिक्षा देने का भी प्रयास किया गया है। ‘चिड़िया का बंगला’ के माध्यम से बच्चों को यही बताने का प्रयास किया गया है कि मानव को अपने समाज के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए, जो अपनी जड़ों से छूट जाता है उसका अस्तित्व ख़तरे में आ जाता है। ‘चौपट राजा’ में यथा राजा तथा प्रजा का अति सरस, सहज भाषा में वर्णन है। व्यंग्यात्मक रूप में लिखा यह नाटक अपनी शैली, भाषा के सहारे अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल है। ‘ताशेवाला’ के माध्यम से गाँव के लड़कों की काम के प्रति चाह दिखाने का प्रयास है। गाँव का एक धनिक अपनी बेटी की शादी में गाँव के ताशेवाले की उपेक्षा कर शहर का बैंड बुलाने की कोशिश करता है लेकिन एक ताशेवाला सियार की नकली आवाज़ निकालकर, भूतों का भय दिखाकर शहरी बैंड को भगा देता है। तीनों नाटक अति मनोरंजक हैं।

विजय तेंडुलकर वर्तमान भारतीय रंग-परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण नाटककार के रूप में समादृत श्री तेंडुलकर मूलतः मराठी के साहित्यकार हैं जिनका जन्म 7 जनवरी, 1928 को हुआ। उन्होंने लगभग तीस नाटकों तथा दो दर्जन एकांकियों की रचना की है, जिनमें से अनेक आधुनिक भारतीय रंगमंच की। क्लासिक कृतियों के रूप में शुमार होते हैं। उनके नाटकों में प्रमुख हैं-शांतता! कोर्ट चालू आहे (1967), सखाराम बाइंडर (1972), कमला (1981), कन्यादान (1983)। श्री तेंडुलकर के नाटक घासीराम कोतवाल (1972) की मूल मराठी में और अनूदित रूप में देश और विदेश में छह हज़ार से ज़्यादा प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं। मराठी लोकशैली, संगीत तथा आधुनिक रंगमंचीय तकनीक से सम्पन्न यह नाटक दुनिया के सर्वाधिक मंचित होने वाले नाटकों में से एक का दर्जा पा चुका है। श्री तेंडलकर ने बच्चों के लिए भी ग्यारह नाटकों की रचना की है। उनकी कहानियों के चार संग्रह और सामाजिक आलोचना व साहित्यिक लेखों के पाँच संग्रह प्रकाशित हो। चुके हैं। इन्होंने दूसरी भाषाओं से मराठी में अनुवाद किये हैं, जिसके तहत नौ उपन्यास, दो जीवनियाँ और पाँच नाटक भी उनके कृतित्व में शामिल हैं। इसके अलावा बीस के करीब फ़िल्मों का लेखन। हिन्दी की निशान्त, मन्थन, आक्रोश, अर्धसत्य आदि। दूरदर्शन धारावाहिक स्वयंसिद्ध, प्रिय तेंडुलकर टॉक शो। सम्मान पुरस्कार : नेहरू फेलोशिप (1973-74), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में अभ्यागत प्राध्यापक के रूप में (1979-1981), पद्म भूषण (1984), फ़िल्मफेयर से पुरस्कृत। 19 मई, 2008 को पुणे (महाराष्ट्र) में महाप्रस्थान।

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