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Ek Aur Durghatna

by Dario Fo
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556527
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 88
  • Original Price: INR 325.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

रूपान्तरकार की ओर से - यूँ तो सभी नाटक, सभी कृतियाँ किसी न किसी रूप में, किसी न किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं, किन्तु डारियां फ़ो के नाटक विशुद्ध राजनीतिक नाटक होते हैं। एक्सीडेंटल डैथ ऑफ़ एन एनार्किस्ट का हिन्दी रूपान्तरण करते हुए हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या यही थी । भारतीय राजनीति की तुलना में इतालवी राजनीति के समीकरण बहुत भिन्न हैं । और यही चुनौती थी हमारे लिए कि नाटक का राजनीतिक कलेवर भी बना रहे, नाटकीय परिस्थितियों का पैनापन और कटाक्ष भी भोथरा न हो, साथ-ही-साथ भारतीय दर्शकों को नाटक अपना-अपना-सा लगे। रूपान्तरण का हमारा यह प्रयास अगर कामयाब हुआ है, तो इसका काफ़ी श्रेय डारियो फ़ो को भी जाता है, उनकी विशिष्ट लचीली, नाट्य-शैली एवं नाट्य-संरचना के लिए, जिसमें इम्प्रोवाईजेशन की अपार सम्भावनाएं रहती हैं- हर स्तर पर । यह अन्याय होगा, अगर मैं अपने उन साथियों का ज़िक्र न करूँ, जिन्होंने रूपान्तरण के दौरान अपना सहयोग और बहुमूल्य सुझाव दिये । विशेषकर श्री बैरी जॉन, सतीश चाँद, महेश वशिष्ठ, लाला हज़ारिका, रौबिनदास एवं अनीला सिंह, इन सभी के कारण यह रूपान्तरण सम्भव हो पाया।- अमिताभ श्रीवास्तव

डारियो फ़ो -प्रसिद्ध यूरोपीय नाटककार डारियो फ़ो का जन्म 1926 में इटली में हुआ था। उनके एक्सीडेंटल डेथ ऑफ़ ऐन अनार्किस्ट, फीमेल पार्ट्स जैसे नाटकों का अनुवाद संसार की अनेक भाषाओं में हुआ है। आम आदमी के आत्मसम्मान की लड़ाई लड़नेवाले इस नाटककार को 1997 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।★★★अमिताभ श्रीवास्तव -जन्म : 12 जुलाई 1955 को जबलपुर (म.प्र.) में । शिक्षा : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से 1979 में स्नातक । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर । स्नातक परीक्षा के पश्चात दिल्ली के रंगमंच से जुड़े हैं । रंगमंच की दुनिया के पुरोधा एवं महान निदेशकों, इब्राहीम अलकाजी, बी.वी. कारन्त, फ्रित्ज़ बेनेवित्ज़ (जर्मनी), बेरी जॉन, रणजीत कपूर तथा अमाल अल्लाना के सहयोगी होने का अवसर प्राप्त हुआ ।दिल्ली के प्रसिद्ध रंगशाला - ग्रुप 'सम्भव' की स्थापना की। नेशनल रिप्रेट्री कम्पनी के साथ यू.के., जर्मनी तथा पोलैण्ड का भ्रमण किया ।विगत 12 वर्षों से लेखक, निर्देशक तथा निर्माता की हैसियत से कार्य में जुटे हैं। आई.टी.वी. के साथ सम्बद्ध होकर टेली-प्ले तथा डॉक्युमेंट्री फ़िल्मों सम्बन्धी कार्यक्रमों का निर्माण एवं विकास किया है।लेखन एवं संवाद लेखन में श्री श्रीवास्तव ने विशिष्टता बनाये रखी है। विशेष रूप से विश्व प्रसिद्ध महान नाटकों- 'दि-फूल', 'दि टैम्पेस्ट गुड वुमेन ऑफ़ सेल्जआँ', 'दि विजिट', 'हैड्डा गेब्लर', 'दि ऑड कॅपल इत्यादि के रूपान्तरण में । इसके अतिरिक्त दूरदर्शन के लिए-'ज़ेवर का डिब्बा', 'तितली', 'वापसी' एवं 'शीशे का घर' आदि का मूल संवाद लेखन भी किया है। सृजनशील एवं स्पन्दनशील इकाई के प्रमुख के नाते मुक्तिबोध (डॉक्युमेंट्री ड्रामा), पहल (टेलीफ़िल्म), विदूषक (टी.वी. सीरियल), इलैक्ट्रोप्लेटिंग ए हैजाईस इंडस्ट्री (डॉक्युमेंट्री) जैसे बड़े उत्पादों का उत्तरदायित्व एक निर्देशक के रूप में अपने कन्धों पर लेकर सहजता के साथ निर्वाह किया है।दिल्ली की सांस्कृतिक रंगभूमि में निस्पृह भागीदारी की है तथा मीडियम के स्तर पर विभिन्न वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और संवादों में अपना योगदान दिया है।

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