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Rati Ka Kangan

by Surendra Verma
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788119014385
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 150
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

रति का कंगनरति का कंगन हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र वर्मा की नवीनतम विशिष्ट नाट्य-कृति है। दिव्य के पीछे कभी गर्हित भी होता है लेकिन गर्हित का ही रूपान्तर फिर दिव्य में हो जाने की क्षत-विक्षत नाट्य-कथा है- रति का कंगन ।परम स्वार्थी मल्लिनाग की उपस्थिति प्रथमदृष्टया 'गीता' से सम्बन्धित विषय के शोधार्थी के रूप में होती है लेकिन अकादमिक संसार में मनोदेहिक क्षुद्रताओं का शिकार बन धनार्जन की खातिर उसे 'कामसूत्र' के लेखन के लिए विवश होना पड़ता है। मानक सिद्ध होते ही, इस कालजयी कृति की सतत विक्रय वृद्धि के कारण प्रकाशक की लालची दृष्टि पड़ जाने से मल्लिनाग को अपना धनार्जन का बुनियादी लक्ष्य पूरा हुआ नहीं लगता। फिर 'कामसूत्र' पर पड़ती है नैतिकता के स्वयम्भू ठेकेदार की कोपदृष्टि। पुनश्च निराशा की गहरी अँधेरी रात से निकलकर अन्ततः समरस वीतराग तक पहुँच जाने की मनःस्थिति- इसी का नाम है रति का कंगन ।नाटक का उत्तरार्ध राग-भाव के अनेक वंचक व्यवहारों से सना हुआ है। प्रतिशोध की दुर्भावना से सम्पृक्त कौटिल्य का मल्लिनाग और अपनी पुत्री मेघाम्बरा की ज़िन्दगी में ज़हर घोलना, कामिनी श्रीवल्लरी की बौखलाहट, चिरकुमारी आचार्य लवंगलता की अपने शोधार्थी युवा मल्लिनाग में अनुरक्ति विवाहिता नवयुवती कोकिला का त्रिकोणी स्वच्छन्द प्रेम आदि अनेक घटनाएँ कामसूत्र से उपजे अर्थ - अनर्थ की व्याख्या करती हैं। इस तरह शृंगार के सहारे विविध रसानुभूतियों को खंगालने वाली यह कृति नाट्यभाषा एवं कला की नयी धार देती है।

सुरेन्द्र वर्माजन्म : 7 सितम्बर, 1941शिक्षा : एम.ए. (भाषाविज्ञान)अभिरुचियाँ : प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय इतिहास, सभ्यता एवं संस्कृति; रंगमंच तथा अन्तरराष्ट्रीय सिनेमा में गहरी दिलचस्पी ।कृतियाँ : मुग़ल महाभारत, तीन नाटक, सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक, आठवाँ सर्ग, शकुन्तला की अंगूठी, कैद-ए-हयात, रति का कंगन (नाटक); नींद क्यों रात भर नहीं आती (एकांकी); जहाँ बारिश न हो (व्यंग्य); प्यार की बातें, कितना सुन्दर जोड़ा (कहानी-संग्रह); अंधेरे से परे, मुझे चाँद चाहिए, दो मुर्दों के लिए गुलदस्ता और काटना शमी का वृक्ष पद्मपंखुरी की धार से (उपन्यास) ।सम्मान : संगीत नाटक अकादेमी और साहित्य अकादेमी द्वारा सम्मानित ।सम्पर्क : टी-6, ग्रीन व्यू अपार्टमेंट्स, मांडी, नयी दिल्ली - 110047 मो। : 09268125668, ई-मेल : svstormysoul@gmail.com

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