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Yog Aur Yogasan

by Swami Akshya Atmanand
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789351868170
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 200
  • Original Price: INR 400.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 345 grams
  • BISAC Subject(s): Yoga

महर्षि पतंजलि ने एक सूत्र दिया है—‘योगश्चित्तः वृत्ति निरोधः’। इस सूत्र का अर्थ है—‘योग वह है, जो देह और चित्त की खींच-तान के बीच, मानव को अनेक जन्मों तक भी आत्मदर्शन से वंचित रहने से बचाता है। चित्तवृत्तियों का निरोध दमन से नहीं, उसे जानकर उत्पन्न ही न होने देना है।’‘योग और योगासन’ पुस्तक में ‘स्वास्थ्य’ की पूर्ण परिभाषा दी गई है। स्वास्थ्य की दासता से मुक्त होकर मानवमात्र को उसका ‘स्वामी’ बनने के लिए राजमार्ग प्रदान किया गया है।‘स्वास्थ्य’ क्या है? ‘स्वस्थ’ किसे कहते हैं?मृत्यु जिसे छीन ले, मृत्यु के बाद जो कुछ हमसे छूट जाए वह सब ‘पर’ है, पराया है। मृत्यु भी जिसे न छीन पाए सिर्फ वही ‘स्व’ है, अपना है। इस ‘स्व’ में जो स्थित है वही ‘स्वस्थ’ है।कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का वास होता है। यदि शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो आत्मा का स्वस्थ रहना कहाँ संभव होगा। इस पुस्तक को पढ़कर निश्चय ही मन में ‘जीवेम शरदः शतम्’ की भावना जाग्रत होती है।प्रस्तुत पुस्तक उनके लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है जो दवाओं से तंग आ चुके हैं और स्वस्थ व सबल शरीर के साथ जीना चाहते हैं।

‘योग-जगत्’ के एक अति श्रद्धास्पद अधिकारी गुरु के रूप में प्रख्यात रहे स्मृतिशेष स्वामी श्री अक्षय आत्मानंदजी का। स्वामीजी ने योगासन, प्राणायाम, अध्यात्म-विज्ञान, सम्मोहन-विज्ञान और चिकित्सा-विज्ञान आदि विषयों पर अत्यंत सरल-सुबोध भाषा, तार्किक शैली में अनेक अति रोचक ग्रंथों की रचना की। स्वामीजी का साहित्य इतना सराहा गया कि उनके ग्रंथों के कई-कई संस्करण हुए।स्वामी महाराज का जीवन नितांत स्वच्छ, सरल तथा निश्छल रहा। स्वामीजी पाठकों की योग संबंधी समस्याओं के समाधान पत्र द्वारा भी करते थे।

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