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115 Din Ki Tirath Yatra

by Omkar
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789390825172
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 104
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

जैसा कि पुस्तक के शीर्षक से प्रतीत होता है, यह पुस्तक उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व पौड़ी गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावतजी के मुख्यमंत्री काल पर आधारित है। इस पुस्तक में न केवल तीरथजी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में विस्तार से लिखा गया है बल्कि उनके मुख्यमंत्री बनने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए इस पहाड़ी राज्य की राजनीति पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के कारणों पर भी अच्छी तरह से प्रकाश डाला गया है। साथ ही बताया गया है कि असंभव से प्रतीत हो रहे कुंभ मेले को भव्यता से संपन्न कराने की प्रशंसा की बजाय उन्हें कोरोना फैलाने का दोषी दिखाने का प्रयास किया गया। परंतु जब धीरे-धीरे कोरोना की दूसरी लहर पर भी नकेल डाल दी गई तो दूसरे कारणों से उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जाने लगी। हालाँकि अपने दृढ़ निश्चय और कर्तव्यपरायण व्यक्तित्व के कारण मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपने कार्यों से सभी आलोचकों की बोलती बंद कर दी; लेकिन फ़िर भी सीधे-सादे और प्रदेश की बेहतरी चाहनेवाले तीरथजी ने राजनीति की चालबाजी में पड़ने की बजाय पद से इस्तीफा देना ज्यादा उचित समझा।पुस्तक को अध्यायों में बाँटा गया है और मुख्य तीन भागों में विभक्त किया गया है--(क) त्रिवेंद्र रावतजी का जाना, तीरथजी का शपथ ग्रहण और कुंभ का आयोजन ।(ख) कोविड की दूसरी लहर पर नियंत्रण व प्रदेश में विकास की बयार ।(ग) मुख्यमंत्री तीरथ रावतजी की विदाई ।

ओमकार—पल्प एंड पेपर टेबनोलॉजी में पीजी के बाद पंजाब के जालंधर को अपनी कर्मस्थली चुना, और क्योंकि शिक्षण हमेशा से ही ओमकार के दिल के करीब रहा था, इसलिए वहाँ पर विज्ञान के अध्यापन कार्य में अपने आप को लगा दिया। हिंदी के प्रति लगाव के कारण “दैनिक भास्कर' अखबार के साथ जुड़े । अध्यापन तथा पत्रकारिता में सामंजस्य बैठाते हुए सन्‌ 2012 के विधानसभा चुनाव में चुनाव विश्लेषण में हाथ आजमाया । इस क्षेत्र में आने के बाद एहसास हुआ कि पत्रकारिता करते हुए राजनीति का ज्ञान सतही स्तर पर होता है और भारतीय राजनीति को समझने के लिए अभी और ज्यादा प्रयास की आवश्यकता है। इसी कड़ी में देश की राजधानी को अपना नया ठिकाना बनाया। परंतु पत्रकारिता या लेखन से लगाव होने के कारण कुछ प्रतिष्ठित पत्रिकाओं व अखबारों के लिए लिखना जारी रखा, जबकि दैनिक पत्रकारिता से नाता टूट चुका था। इस दौरान कई प्रादेशिक व राष्ट्रीय नेताओं से संपर्क स्थापित हुआ, जिनमें से तीरथ सिंह रावत प्रमुख राजनेता है । इन्हीं की प्रेरणा मिलने के बाद लेखक के रूप में प्रथम प्रयास इस पुस्तक के रूप में चरितार्थ हुआ। फिलहाल दो और राजनीतिक पुस्तकों की पांडुलिपियों पर काम चल रहा है।

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