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Isee Kaya Mein Moksha

by Dinesh Kushwah
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789360862862
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 126
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

दिनेश कुशवाह संवेदनात्मक ज्ञान के आलोचकीय विवेक सम्पन्न कवि हैं। उनकी कविताएँ सहजबुद्धि के विवेक से उपजी रचनाएँ हैं; इसीलिए मुक्त छन्द में होने के बावजूद उनमें संगति, गत्यात्मकता, आन्तरिक लय, संवेदना एवं प्रेम के स्वर प्रमुख हैं। व्यक्तियों, सम्बन्धों, स्थानों पर केन्द्रित दिनेश कुशवाह की कविताएँ स्मृति, आत्मीयता और मूल्यांकन की ईमानदार मनुष्योपयोगी कलाकृतियाँ हैं। दिनेश कुशवाह की प्रेम कविताओं में प्रेम समाजशास्त्रीय या मनोवैज्ञानिक अध्ययन के विषय के रूप में जीवनीशक्ति की तरह आता है–आर्द्र और उष्ण! विषयों की विविधता, प्रगतिशील मूल्यों की पक्षधरता एवं परकाया प्रवेश से कवि ने अपनी कविताओं का संसार उदार एवं व्यापक बनाया है। दिनेश कुशवाह की लड़की विषयक, अभिनेत्रियों पर और ‘एकलव्य की तरफ से’ जैसी कविताएँ उतनी ही प्रामाणिक हैं जितनी हमारी नजरों के सामने की यह दुनिया। ‘लड़की और सोना’, ‘नदी’ तथा ‘खजुराहो में मूर्तियों के पयोधर’ सौन्दर्य के दोनों पक्षों की गंगा-जमुनी कृतियाँ हैं। संक्षेप में दिनेश कुशवाह की सौन्दर्य-दृष्टि दार्शनिक महत्वाकांक्षा रखती है। कविताओं में मौजूद प्रवाहमयता, रागात्मकता, ओजस्विता के प्रसंग में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दिनेश कुशवाह का कवि-कर्म विद्यापति के अपरूप रूप, तुलसी के कवित्व विवेक, कबीर की आँखिन देखी, मीर-गालिब की दुनिया और विश्व साहित्य के गम्भीर अध्ययन से उत्पन्न सूझ और लोकसंपृक्ति से परिचालित होता है। पाठकों को हर्ष होगा कि दिनेश कुशवाह की कविताओं में समझ में न आने लायक कुछ नहीं है। अपठनीय, दुर्बोध, भीषण बौद्धिक कविताओं के इस संकटपूर्ण समय में उनकी कविताएँ पढ़ने और याद रखने योग्य हैं। वे प्रेम, सौन्दर्य और परिवर्तनकामी चेतना के कवि हैं। सही मायने में ‘मेजर वेवलेंथ’ के कवि। –प्रह्लाद अग्रवाल

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