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Ragini

by Gopal Singh Nepali
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789360866501
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 104
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 11 grams
  • BISAC Subject(s): General

नेपाली जी में साहित्य की एक प्रखर प्यास है, जिसके बुझने पर साहित्य का कल्याण निर्भर है। —सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ वह तो मैं हूँ, जो हँसता हूँ/मस्ती है, कुछ गाता हूँ जो रोते हैं उन्हें मनाकर/अपना गीत सुनाता हूँ सन् 1935 में पहली बार प्रकाशित नेपाली जी का ‘रागिनी’ काव्य-संग्रह जीवन और संसार के विभिन्न पक्षों को सम्बोधित कविताओं का संकलन है। यह काव्य का सहज प्रवाह है, जिसे कवि अबाध, हर क्षण न केवल अपने भीतर बहने देता है, बल्कि कविता के अनुशासन में रचकर उसे हमारे पास तक भी पहुँचाता है। ‘वंदगी’ शीर्षक कविता में अपने अन्तस के कृतज्ञता भाव को चर-अचर जगत को समर्पित करते हुए जब वे कहते हैं : वंदे तरु के पीले पत्ते, जिनमें कुछ रस-धार न हो; वैसे यहाँ न हों प्रेमी, तो सच कह दूँ संसार न हो तो कविता जैसे अपनी सर्वांग चिन्ता के साथ हमारे सम्मुख प्रकट हो उठती है। कवि के अनुसार, साहित्य में आत्मीयता का बड़ा महत्त्व है। यहाँ स्नेह की, संवेदना की सरिता कूल-किनारों को डुबा-डुबाकर बहती है। कविता के प्रति यह आस्था ही गोपाल सिंह नेपाली को एक विशिष्ट कवि बनाती है जिन्होंने जीवन-भर उसे एक ध्वज की तरह उठाए रखा।

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