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Peeth Pichhe Ka Aangan

by Anirudh Umat
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388753869
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 14 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

'पीठ पीछे का आँगन' आज दिन-भर रुक-रुक कर, चाव और प्यार से, पढता रहा और तुम्हारी कलाकारी से अभिभूत होता रहा | पिछले तीन-चार सालों में शायद ही किसी उपन्यास को मैंने इतने प्यार से पढ़ा हो | पहले वाक्य ने ही मुझे जकड लिया: 'अन्तहीन काली ऊन' | अँधेरे को ऐसी अनूठी उपमा शायद ही किसी और ने दी हो | मैंने पढ़ते हुए इतने निशान लगाए हैं, इतने वाक्य के नीचे लकीरें खींची हैं कि कोई देखे तो हैरान हो | जाहिर है कि मैं तुम्हारे इस उपन्यास से बहुत प्रभावित, बहुत आश्वस्त, बहुत चमत्कृत हुआ हूँ | पहले उपन्यास (अँधेरी खिड़कियाँ) में जो संभावनाएँ थीं, इसमें वे साकार हो गई हैं | सबसे अधिक मैं इस बात से प्रभावित हूँ कि तुम सारे उपन्यास में बहुत संयत हो-और तुमने एक तरह से (फिर) स्थापित कर दिया है कि उपन्यास में अमूर्तन संभव ही नहीं, सुन्दर भी हो सकता है, कि प्रयोग अराजकता का पर्याय नहीं, कि 'प्रयोगवादी' उपन्यास भी उपन्यास ही है-साधारण यथार्थ के बगैर, भाषा और शिल्प के सहारे, आन्तरिकता के सहारे, मानवीय लाचारियों के सहारे... कहने का मतलब यह कि तुमने अपने इस काम से मुझे प्रभावित ही नहीं किया, मोह भी लिया | --कृष्ण बलदेव वैद.

अनिरुद्ध उमट 28 अगस्त, 1964 को बीकानेर में जन्मे अनिरुद्ध उमट के अब तक दो उपन्यास, दो कविता-संग्रह, एक कहानी-संग्रह एवं एक निबंध-संग्रह प्रकाशित हैं। राजस्थानी कवि वासु आचार्य के साहित्य अकादमी से सम्मानित कविता-संग्रह ‘सीर रो घर’ का हिंदी में अनुवाद | ‘अँधेरी खिड़कियाँ’ पर राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर का ‘रांगेय राघव स्मृति सम्मान | संस्कृति विभाग (भारत सरकार) की ‘जूनियर फेलोशिप’ तथा ‘कृष्ण बलदेव वैद फेलोशिप’ प्रदत्त | संपर्क: राजकीय मुद्रणालय के समीप, बीकानेर - 334 001 (राजस्थान)।.

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