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Natak Fareb-E-Hasti

by Sadique
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789393603661
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: LokBharti Prakashan
  • Publisher Imprint: LokBharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 96
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 61 grams
  • BISAC Subject(s): General

‘नाटक फ़रेब-ए-हस्ती’ ग़ालिब पर लिखा गया अनोखा नाटक है। इस नाटक में एक रोचक हादसे की वजह से मिर्ज़ा ग़ालिब को मौजूदा सदी में पेश होना पड़ता है। यह हादसा इतना दिलचस्प है कि 18वीं सदी का मशहूर शायर जब आज की दिल्ली में घूमता है तो मानो हर चीज़ उससे कॉमेडी करती नज़र आती है। लेकिन बात केवल कॉमेडी तक ही सीमित नहीं है, कहानी एक नया मोड़ तब लेती है जब खुफ़िया एजेंसी के कुछ अफ़सर ग़ालिब को पड़ोसी देश का जासूस समझते हुए उनकी गतिविधियों को नोटिस करना शुरू कर देते हैं। लेखक ने इस रोचक फंतासी को एकदम यथार्थवादी अन्दाज़ में पेश किया है जहाँ पर हर दृश्य के बाद स्थितियाँ और भी ड्रामाई होती चली जाती हैं। इस सब के बीच माज़ी और हाल के न जाने कितने सवाल और उनके जवाब जुगनुओं की तरह झिलमिलाते रहते हैं।

बहुआयामी प्रतिभा के धनी सादिक़ हिन्दी और उर्दू के सुप्रसिद्ध लेखक और चित्रकार हैं। उनका जन्म सन् 1943 में उज्जैन में हुआ था। सादिक़ ने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.ए. करने के बाद मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से एम.ए. और पी-एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। छह वर्षों तक महाराष्ट्र के एक डिग्री कॉलेज में अध्यापन करने के बाद यूपीएससी से सेलेक्ट होकर शिक्षा मंत्रालय के ‘तरक़्क़ी-ए-उर्दू बोर्ड’ में कार्य करते रहे। 1981 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में आए, जहाँ से 2008 में विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए। सादिक़ ने कई साहित्यिक विधाओं में यादगार रचनाएँ लिखी हैं, जिनमें नज़्में, ग़ज़लें, कविताएँ, लम्बी कविताएँ, गीत, पैरोडी, कहानियाँ, समीक्षाएँ, आलोचना, शोध, और नाटक इत्यादि शामिल हैं। अमीर खुसरो और ग़ालिब पर उन्हें ‘विशेषज्ञ’ का दर्ज़ा हासिल है। बनारस पर ग़ालिब की अप्रतिम मसनवी ‘चिराग़-ए-दैर’ का हिन्दी में अनुवाद उनका ख़ास कारनामा है, जिसके अंग्रेज़ी और मराठी अनुवाद भी प्रकाशित हो चुके हैं। सादिक़ को सूफ़ीवाद से ख़ास लगाव रहा है। इस विषय पर देश के विभिन्न शहरों के अलावा, शिकागो, न्यूयॉर्क, ओरलेंडो, लंदन, लाहौर, कराची तथा भूटान में उनके यादगार लेक्चर हो चुके हैं। फ़िलहाल स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।

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