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Anandghan

by Ed. by Dr. Ramdev Shukla
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350009840
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 128
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Encyclopedias

आनन्दघन - आनन्दघन की कविता अतिरिक्त संवेदनशीलता, समझ और अध्ययन की अपेक्षा करती हैI इनकी कविता में भाषा के स्तर पर एक उच्च भाव तो है ही साथ ही गरिमा के सौन्दर्य की गूढ़ आवृति भी इनकी कविताओं का ही एक पक्ष हैI कवि ह्रदय की भाषा के काव्य बोध की शाश्वतता के साथ मिलकर इनका काव्य बोध एक आलाप में बदल जाता हैI यह प्रेम में मुक्ति का एक सन्देश भी सम्प्रेषित करता है जो वियोग श्रृंगार में परिवर्तित हो जाता है लेकिन यह वियोग श्रृंगार भी विशुद्ध माधुर्य रचता हैI वियोग वर्णन भी अधिकतर अन्तर्वृत्ति निरूपक है, बाह्मार्थ निरूपक नहीं। घनानन्द ने न तो बिहारी की तरह विरह-ताप को बाह्री माप से मापा है न बाहरी उछलकूद ही दिखाई है। जो कुछ हलचल है वह भीतर की है। इस संग्रह की कविताएँ पूर्ण रूप से रस, प्रीति और ब्रह्मा की अनुभूति प्राण करती हैंI पाठकों को यह संग्रह एक पाठकीय सन्तुष्टि प्रदान करता हैI

सम्पादक - डॉ. रामदेव शुक्ल - कुशीनगर (उ.प्र.) ज़िले के शाहपुर - कुरमोटा गाँव में जन्मे डॉ. रामदेव शुक्ल (जन्म- 5.1.1938) सुधी आलोचक के साथ प्रतिष्ठित कथाकार भी हैंI उन्होंने रीतिकाल के दो महत्वपूर्ण कवियों- घनानन्द और बिहारी का मूल्यांकन करने में मौलिक दृष्टि का परिचय दिया हैI ‘घनानन्द का श्रृंगार काव्य’, ‘आनन्दघन’, ‘सामन्ती परिवेश की जनाकाँक्षा और बिहारी’, ‘बिहारी के काव्य का पुनर्मूल्यांकन’, ‘निराला के उपन्यास’, ‘निराला के कथा-गद्य का आस्वादन’, ‘बिहारी-सतसई का पुनर्पाठ’ आदि उनकी आलोचनात्मक पुस्तकें हैंI घनानन्द के काव्य की आलोचना और उसकी व्याख्या का दायित्व एक बड़ी चुनौती स्वीकार करना है जिसे शुक्ल जी ने स्वीकार ही नहीं किया अपितु उसे भली-भाँति निभायाI

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