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Andher Nagri

by Bhartendu Harishchand
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9780143482444
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Penguin Swadesh
  • Publisher Imprint: Penguin Swadesh
  • Publication Date:
  • Pages: 64
  • Original Price: INR 150.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 58 grams
  • BISAC Subject(s): General

यह भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा 1881 में रचित एक प्रसिद्ध हिंदी नाटक है। यह नाटक अपनी इस लोकप्रिय पंक्ति के लिए जाना जाता है―'अंधेर नगरी, चौपट राजा। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।'
यह एक राजनीतिक व्यंग्य है जो विवेकहीन शासन और मूर्ख प्रशासन पर प्रहार करता है, जहाँ न्याय और अन्याय में कोई भेद नहीं होता। इसमें एक लोभी चेले (गोवर्धन दास) की कथा है, जो ऐसी नगरी में फँस जाता है जहाँ हर चीज़ का दाम एक टका होता है। अंत में, उसका गुरु अपनी बुद्धि से उसे फाँसी से बचाता है। इसे आधुनिक हिंदी नाटक का मील का पत्थर माना जाता है। यह नाटक जनता को शासन की विसंगतियों के प्रति जागरूक बनाता है। जो राजा जनता के प्रति संवेदनशील नहीं, उसके राज में सच्चे लोग मारे जाते हैं तथा धूर्त लोग फलते-फूलते हैं। तानाशाह की सत्ता है, न्याय का आडंबर होता और जनता का शोषण किया जाता है। ऐसी नगरी में गुणवान और गुणहीन लोगों में कोई भेद नहीं किया जाता।

भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। भारतेंदु हिंदी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। जिस समय भारतेंदु हरिश्चंद्र का आविर्भाव हुआ, देश ग़ुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। अंग्रेज़ी शासन में अंग्रेज़ी चरमोत्कर्ष पर थी। शासन तंत्र से संबंधित संपूर्ण कार्य अंग्रेज़ी में ही होता था। ब्रिटिश आधिपत्य में लोग अंग्रेज़ी पढ़ना और समझना गौरव की बात समझते थे। हिंदी के प्रति लोगों में आकर्षण कम था, क्योंकि अंग्रेज़ी की नीति से हमारे साहित्य पर बुरा असर पड़ रहा था। ऐसे वातावरण में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने सर्वप्रथम समाज और देश की दशा पर विचार किया और फिर अपनी लेखनी के माध्यम से विदेशी हुकूमत का पर्दाफ़ाश किया। ब्रिटिश राज की शोषक प्रकृति का चित्रण करने वाले उनके लेखन के लिए उन्हें युग चारण माना जाता है।

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